Friday, March 11, 2011

होली के रंग

कुछ रंग होली के 
कितनी भी कोशिश करने पर
धुल नहीं पाते 
उम्र भर.


कितनी होली आयीं,
कितने रंग लगे,
पर कोई भी 
छुपा नहीं पाया 
उस रंग को,
और सभी धुल गए
होली के जाते ही.
कोई भी रंग
छू नहीं पाया
अंतस  को.


अब तो हर होली पर,
देख कर आइने में
वही पुराना रंग,
मना लेता हूँ
अपनी होली.

31 comments:

  1. कितनी होली आयीं,
    कितने रंग लगे,
    पर कोई भी
    छुपा नहीं पाया
    उस रंग को,
    और सभी धुल गए
    होली के जाते ही.
    कोई भी रंग
    छू नहीं पाया
    अंतस को.

    बहुत भावपूर्ण रचना... कुछ रंग होते ही हैं ऐसे की तन के साथ-साथ मन को भी भिगो जाते हैं जीवन भर के लिए फिर कोई दूसरा रंग उसे छू भी नहीं पाता.. .. सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  2. कहते हैं न प्रीत जितनी पुरानी होगी रंग उतना चोखा होगा आपको भी उस पुराने रंग से इतना लगाव हो गया है कि-
    कोई भी रंग छू नहीं पाया
    अंतस को

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  3. क्या खूब कहा है! होली और रंग की एक विकट किन्तु सर्वाधिक पाई जानेवाली स्थिति।

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  4. yaadon ke rang bade pakke hain , aaj tak saath hain

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  5. कोई भी रंग
    छू नहीं पाया
    अंतस को....

    जो अंतस पर चढ़ जाये वो रंग सबके पास नहीं होता है । लेकिन जिसके अंतस पर किसी का रंग चढ़ा हुआ है , वही सबसे खुशनसीब भी है ।

    .

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  6. बहुत ही खूबसूरत कविता.

    सादर

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  7. देख कर आइने में
    वही पुराना रंग,
    मना लेता हूँ
    अपनी होली.

    बहुत खूबसूरत एहसास ...सोच रही हूँ कि कैसा होगा वो रंग जो अब तक रंग है अंतस ...

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  8. बहुत सुन्दर कविता और वह ना धुलने वाला सुन्दर अहसास .. सच है कि सोच राहें है कि कैसा होगा वह रंग.. अद्भुत सुन्दर

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  9. सुन्दर भावपूर्ण कविता |
    बधाई
    आशा

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  10. कोई भी रंग
    छू नहीं पाया
    अंतस को....

    बहुत ही सुन्‍दर भावमय करते शब्‍द ।

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  11. रंग जो अंतस को रंग जाए . और फिर अमिट रहे . अब आज के दौर में तो मै यही कहूँगा की फैशन के दौर में गारंटी का क्या काम .

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  12. होली के रंगों के रंगारंग माहौल के पूर्व ही अपने अंतस के रंग का भावपूर्ण चित्रण ।

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  13. बहुत ही सुन्दर भाव प्रवाह.
    अंतस को रंगने वाले रंग कहाँ छूटते हैं.
    सलाम.

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  14. बहुत ही सुन्दर भाव, बधाई

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  15. ओह ! होली आ गई । दिन कितनी जल्दी जल्दी बीत जाते हैं पता ही नहीं चलता ।
    "कितनी होली आयीं,
    कितने रंग लगे,
    पर कोई भी
    छुपा नहीं पाया
    उस रंग को,
    और सभी धुल गए
    होली के जाते ही.
    कोई भी रंग
    छू नहीं पाया
    अंतस को."
    बडी गहरी कविता है ।
    होली पर सुंदर भावपूर्ण रचना के लिये बधाई ।

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  16. और सभी धुल गए
    होली के जाते ही.
    कोई भी रंग
    छू नहीं पाया
    अंतस को.
    Aah!Behad bhavpoorn!

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  17. पुराने रंगों की छाप गहरी होती है स्मृति में।

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  18. प्रवीण जी ने सही कहा है। बहुत भावमय रचना। शुभकामनायें।

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  19. होली पर सुंदर भावपूर्ण रचना के लिये बधाई ।

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  20. होली के जाते ही.
    कोई भी रंग
    छू नहीं पाया
    अंतस को.

    भाव पूर्ण सोचने पर मजबूर करती हुई रचना

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  21. अब तो हर होली पर,
    देख कर आइने में
    वही पुराना रंग,
    मना लेता हूँ
    अपनी होली
    सुंदर भावपूर्ण रचना, कैलाश जी !

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  22. कैलाश भाई,
    बहुत ही बढ़िया

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  23. Adarniya sharma sahab ,
    pranam
    rang to prakriti ne saheje hain ,vo sthayi hote hain , bas mijaj ko unake hisab se badalna hota hai . badal lenge . ojpurn abhivyakti. holy mobarak .

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  24. अब तो हर होली पर,
    देख कर आइने में
    वही पुराना रंग,
    मना लेता हूँ
    अपनी होली।

    स्मृतियों का रंग उम्र भर नहीं छूटता।
    इसे पढ़कर हर पाठक अपने अतीत की यात्रा अवश्य कर लेगा।

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  25. होली की बधाई। रचना काफी अच्छी है।

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  26. सच है कुछ रंग ऐसे होते हैं जो जिंदगी भर नही मिटते .... उनका रंग बीती यादो की यादे मेटने नही देता ...

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  27. होली के रंगों का भावपूर्ण चित्रण ।

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