Saturday, September 24, 2011

चाँद छुप जाओ बादलों में अभी


       चाँद छुप जाओ बादलों में अभी, 
    कहीं ज़माने की तुम्हें नज़र न लगे।

प्यार का अर्थ कहाँ समझा है इस दुनियाँ ने,
पाक़ दामन में भी है दाग लगा कर छोड़ा।
ज़िस्म के रिश्ते को ही बस प्यार समझते ये हैं,
रूह के रिश्तों को कभी प्यार से नहीं जोड़ा। 

     अभी न लाओ अधर पर दिल की बातें,
       कहीं ज़माने को यह न गुनाह लगे। 

जाति, मज़हब के लिए खून बहा सकते हैं,
प्यार के साथ को न हाथ बढ़ाता कोई।
हाथ जुड़ जाते हैं नफरत का मकां गढ़ने को,
दंगों में जली बस्ती न बनाता कोई। 

      चलो आज और नयी डगर ढूंढें,
   मंज़िलों का किसी को पता न लगे।

मूँद लो नयन, न कहीं ख़्वाब अश्रु बन जायें,
चलो वहाँ जहां हर ख़्वाब एक हक़ीक़त हो। 
क़दम न रोकें जहां ज़ंजीर झूठे रिश्तों की,
जहां न प्यार की किस्मत में बस नसीहत हो।

अभी छुपा लो सितारों को अपने दामन में,
सजाना जूड़े में जहां पर कोई नज़र न लगे। 

   

47 comments:

  1. जाति, मज़हब के लिए खून बहा सकते हैं,
    प्यार के साथ को न हाथ बढ़ाता कोई।
    हाथ जुड़ जाते हैं नफरत का मकां गढ़ने को,
    दंगों में जली बस्ती न बनाता कोई।
    .....बहुत ही खुबसूरत रचना .....

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  2. अभी छुपा लो सितारों को अपने दामन में,
    सजाना जूड़े में जहां पर कोई नज़र न लगे।

    बहुत खूब कहा है ।

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  3. बादल चमक कुन्द करने में लगे हुये हैं। सुन्दर कविता।

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  4. waah... kitnee sundarta... waah...
    चलो आज और नयी डगर ढूंढें,
    मंज़िलों का किसी को पता न लगे।
    lajawaab...

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  5. मूँद लो नयन, न कहीं ख़्वाब अश्रु बन जायें,
    चलो वहाँ जहां हर ख़्वाब एक हक़ीक़त हो।
    क़दम न रोकें जहां ज़ंजीर झूठे रिश्तों की,
    जहां न प्यार की किस्मत में बस नसीहत हो।

    bahut khub ...

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  6. बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

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  7. बहुत खूब लिखा है आपने . आज नज़र ही खराब हो गयी है.

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  8. जाति, मज़हब के लिए खून बहा सकते हैं,
    प्यार के साथ को न हाथ बढ़ाता कोई।
    हाथ जुड़ जाते हैं नफरत का मकां गढ़ने को,
    दंगों में जली बस्ती न बनाता कोई।

    बहुत सही कहा है सर!

    सादर

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  9. खूबसूरत अभिव्‍यक्ति। बधाई।

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  10. मूँद लो नयन, न कहीं ख़्वाब अश्रु बन जायें,
    चलो वहाँ जहां हर ख़्वाब एक हक़ीक़त हो।
    क़दम न रोकें जहां ज़ंजीर झूठे रिश्तों की,
    जहां न प्यार की किस्मत में बस नसीहत हो।

    यही सच्चाई है आज के समाज की, हकीकत बयान करती दिल को गहरे तक छू जाने वाली कविता!

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  11. हकीकत बयान करती दिल को गहरे तक छू जाने वाली कविता| बधाई।

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  12. प्यार तो बस प्यार है.....हर बंधन से परे...हर सीमा से परे...

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  13. रूह के रिश्तों को कभी प्यार से नहीं जोड़ा

    सुन्दर प्रस्तुति पर बधाई ||

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  14. हाथ जुड़ जाते हैं नफरत का मकां गढ़ने को,
    दंगों में जली बस्ती न बनाता कोई।

    सही कहा है ..बहुत सुन्दर रचना ..

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  15. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  16. अभी न लाओ अधर पर दिल की बातें,
    कहीं ज़माने को यह न गुनाह लगे।

    बेहतरीन रचना है सर,
    सादर...

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  17. सुन्दर शब्द, सुन्दर भाव।

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  18. मूँद लो नयन, न कहीं ख़्वाब अश्रु बन जायें,
    चलो वहाँ जहां हर ख़्वाब एक हक़ीक़त हो।
    क़दम न रोकें जहां ज़ंजीर झूठे रिश्तों की,
    जहां न प्यार की किस्मत में बस नसीहत हो।
    बहुत सुंदर रचना ....

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  19. हाथ जुड़ जाते हैं नफरत का मकां गढ़ने को,
    दंगों में जली बस्ती न बनाता कोई।
    इस पद में न सिर्फ़ हक़ीक़त का बयान है बल्कि समस्या के समाधान की दिशा भी बताई गई है।

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  20. बहुत सटीक और भावपूर्ण रचना |बधाई

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  21. मूँद लो नयन, न कहीं ख़्वाब अश्रु बन जायें,
    चलो वहाँ जहां हर ख़्वाब एक हक़ीक़त हो।

    ख्वाबों को हकीकत में बदलने का सुंदर प्रयास एक भावपूर्ण रचना द्वारा. बधाई.

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  22. मूँद लो नयन, न कहीं ख़्वाब अश्रु बन जायें,
    चलो वहाँ जहां हर ख़्वाब एक हक़ीक़त हो।
    क़दम न रोकें जहां ज़ंजीर झूठे रिश्तों की,
    जहां न प्यार की किस्मत में बस नसीहत हो।

    गीत के भावों को शब्दों के ताने-बाने ने अनुपम सौंदर्य प्रदान किेया है।

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  23. अभी न लाओ अधर पर दिल की बातें,
    कहीं ज़माने को यह न गुनाह लगे।
    बेहतरीन रचना..............

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  24. बेहतरीन रचना....

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  25. बेहतरीन रचना.. सुन्दर अभिव्यक्ति....

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  26. अभी न लाओ अधर पर दिल की बातें,
    कहीं ज़माने को यह न गुनाह लगे।

    गुनाह लगे तो लगने दीजिये,इज़हार तो करना ही होगा

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  27. जाति, मज़हब के लिए खून बहा सकते हैं,
    प्यार के साथ को न हाथ बढ़ाता कोई।
    हाथ जुड़ जाते हैं नफरत का मकां गढ़ने को,
    दंगों में जली बस्ती न बनाता कोई। gudh rachna

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  28. अभी न लाओ अधर पर दिल की बातें,
    कहीं ज़माने को यह न गुनाह लगे।

    Loved these lines..
    Awesome read as ever !!

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  29. जाति, मज़हब के लिए खून बहा सकते हैं,
    प्यार के साथ को न हाथ बढ़ाता कोई।
    हाथ जुड़ जाते हैं नफरत का मकां गढ़ने को,
    दंगों में जली बस्ती न बनाता कोई।
    बहुत खुबसूरत रचना .....

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  30. ज़िस्म के रिश्ते को ही बस प्यार समझते ये हैं,
    रूह के रिश्तों को कभी प्यार से नहीं जोड़ा।

    बहुत ही खूबसूरत अहसास भरे हैं .......लाजवाब|

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  31. जाति, मज़हब के लिए खून बहा सकते हैं,
    प्यार के साथ को न हाथ बढ़ाता कोई।
    हाथ जुड़ जाते हैं नफरत का मकां गढ़ने को,
    दंगों में जली बस्ती न बनाता कोई।

    मेरी घरेलु भाषा भोजपुरी है.. इच्छा हुई की भोजपुरी में प्रतिक्रिया दूँ...

    बहुत बढ़िया लिखले बनी.. आभार.. राउर प्रतिक्रिया के हमरो बा इंतिजार.. एक बेर जरूर आइब.. राउर स्वागत बा...

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  32. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब कविता लिखा है आपने ! उम्दा प्रस्तुती !
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  33. विरले ही कोई समझ पाता है प्यार को । जो समझ ले वही खुशनसीब है।

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  34. अभी छुपा लो सितारों को अपने दामन में,
    सजाना जूड़े में जहां पर कोई नज़र न लगे।

    wah kitna sunder likha hai...

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  35. आपको सपरिवार
    नवरात्रि पर्व की बधाई
    और शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  36. शक्ति-स्वरूपा माँ आपमें स्वयं अवस्थित हों .शुभकामनाएं.

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  37. धीरे धीरे ये प्यार खत्म हो रहा है ... लाजवाब रचना है ...
    नव रात्री की मंगल कामनाएं ..

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  38. बहुत सुन्दर भावों से सजी रचना |इस पावन पर्व पर हार्दिक शुभ कामनाएं |
    आशा

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  39. प्यार का अर्थ कहाँ समझा है इस दुनियाँ ने,
    पाक़ दामन में भी है दाग लगा कर छोड़ा।
    ज़िस्म के रिश्ते को ही बस प्यार समझते ये हैं,
    रूह के रिश्तों को कभी प्यार से नहीं जोड़ा।
    उत्कृष्ट रचना.जमाने की हकीकत को खूबसूरती से बयां किया है.

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  40. प्यार का अर्थ कहाँ समझा है इस दुनियाँ ने,
    पाक़ दामन में भी है दाग लगा कर छोड़ा।
    ज़िस्म के रिश्ते को ही बस प्यार समझते ये हैं,
    रूह के रिश्तों को कभी प्यार से नहीं जोड़ा।
    उत्कृष्ट रचना.जमाने की हकीकत को खूबसूरती से बयां किया है.

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  41. अभिव्यक्ति की सुंदर प्रस्तुति....नवरात्रि की शुभकामनाएं।

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  42. मूँद लो नयन, न कहीं ख़्वाब अश्रु बन जायें,
    चलो वहाँ जहां हर ख़्वाब एक हक़ीक़त हो।
    क़दम न रोकें जहां ज़ंजीर झूठे रिश्तों की,
    जहां न प्यार की किस्मत में बस नसीहत हो।
    बहुत सुंदर भाव लिए बहुत ही सुंदर प्रस्तुति /बधाई आपको /
    आपको और आपके परिवार को नवरात्री की बहुत शुभकामनाएं/मेरे ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया /आशा है आगे भी आपका आशीर्वाद मेरी रचनाओं को मिलता रहेगा /आभार /

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  43. प्यार का अर्थ कहाँ समझा है इस दुनियाँ ने,
    पाक़ दामन में भी है दाग लगा कर छोड़ा।
    ज़िस्म के रिश्ते को ही बस प्यार समझते ये हैं,
    रूह के रिश्तों को कभी प्यार से नहीं जोड़ा।

    सत्य अभिव्यक्ति। सुंदर गजल की प्रस्तुति के लिये बधाई।

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