Friday, November 04, 2011

क्षणिकायें

१)
छुपा के रखा है 
दिल के एक कोने में 
तुम्हारा प्यार,
शायद ले जा पाऊँ
आख़िरी सफ़र में 
अपने साथ
बचाकर 
सब की नज़रों से.

२)
बहुत तेज सुनायी देती है
दिल की धड़कन
और साँसों की सरसराहट 
अकेले सूने कमरे में.
कौन कहता है
कि अकेलापन
अकेला होता है.

३)
डर नहीं लगता 
मौत के साये से,
डर तो यह है
यह ज़िंदगी 
जियें कैसे.

४)
भुलाने को उनको
रख दीं उनकी यादें
बंद करके लिफ़ाफ़े में
किताबों के बीच,
पर क्या करें
रख नहीं पाते
अपने से दूर
वह किताब
कभी बुक शैल्फ पर.

५)
मौन पसरा हुआ अँधेरे में
अश्रु ठहरे हुए हैं पलकों पर,
कैसे निभाऊँ वादा
दिया तुमको,
कैसे समझाऊँ दर्द को अपने
जो आतुर है
बिखरने को
मेरे गीतों में.

51 comments:

  1. सभी क्षणिकाएं एक से बढ़ कर एक पर हमें तो पहली वाली भा गयी ....मन फ्रेश हो गया

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  2. मौन पसरा हुआ अँधेरे में
    अश्रु ठहरे हुए हैं पलकों पर,
    कैसे निभाऊँ वादा
    दिया तुमको,
    सभी क्षणिकाये एक से बढ़ एक कैलाश जी
    गहरे अहसासों का अनुभव कराती हुई

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  3. एक से बढ़कर एक क्षणिकाएं....लाजवाब...

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  4. क्या बात है , ख़यालात की उलझाये नहीं उलझते , सुलझते ही जाते हैं .... प्रभावशाली शिल्प ,.शुक्रिया सर !

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  5. बहुत सुन्दर क्षणिकाएं हैं सर,
    सभी एक से बढ़ कर...
    सादर...

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  6. बड़े ही रोचक ढंग से बतायी गयी मन की बातें।

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  7. सभी क्षणिकाएँ बहुत ही अच्छी हैं सर!

    सादर

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  8. भुलाने को उनको
    रख दीं उनकी यादें
    बंद करके लिफ़ाफ़े में
    किताबों के बीच,
    पर क्या करें
    रख नहीं पाते
    अपने से दूर
    वह किताब
    कभी बुक शैल्फ पर... kaise rakha ja sakta hai bhala !

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  9. पाचों क्षणिकाएं बढ़िया है.

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  10. सभी एक से बढकर एक है पर चौथे नंबर वाली बेहतरीन लगी. सादर.

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  11. डर नहीं लगता
    मौत के साये से,
    डर तो यह है
    यह ज़िंदगी
    जियें कैसे.

    सभी क्षणिकाएं बेहतरीन हैं....

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  12. मौन पसरा हुआ अँधेरे में
    अश्रु ठहरे हुए हैं पलकों पर,

    मन को भिंगोने वाला बिम्ब।

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  13. सभी क्षणिकाएं दिल को छू गईं...
    बेहतरीन
    आभार.....

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  14. डर नहीं लगता
    मौत के साये से,
    डर तो यह है
    यह ज़िंदगी
    जियें कैसे.

    भावुक कर गयीं क्षणिकाएँ ...

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  15. बहुत तेज सुनायी देती है
    दिल की धड़कन
    और साँसों की सरसराहट
    अकेले सूने कमरे में.
    कौन कहता है
    कि अकेलापन
    अकेला होता है.
    बहुत ही खूब...कशिशपूर्ण क्षणिकाएं.

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  16. क्षणिकाएं दिल को छू गईं...

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  17. मौन पसरा हुआ अँधेरे में
    अश्रु ठहरे हुए हैं पलकों पर

    दिल को भावुक कर गयीं क्षणिकाएँ

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  18. हृदयस्पर्शी क्षणिकाएं!

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  19. खुबसूरत..क्षणिकाएं...

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  20. डर नहीं लगता
    मौत के साये से,
    डर तो यह है
    यह ज़िंदगी
    जियें कैसे...
    har nakam ek se badhkar ek hai sir ji...
    jai hind jai bharat

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  21. बहुत बढिया, बधाई।

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  22. छुपा के रखा है
    दिल के एक कोने में
    तुम्हारा प्यार,
    शायद ले जा पाऊँ
    आख़िरी सफ़र में
    अपने साथ
    बचाकर
    सब की नज़रों से.

    सुभानाल्लाह..........ये सबसे बढ़िया और भी सभी अच्छी हैं|

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  23. बहुत सुन्दर क्षणिकाएं ......

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  24. दिल की गहराई में क्या है यह खुद दिल भी नहीं जानता... कभी कभी कुछ थोड़ा सा कोई कहला जाता है... हृदयस्पर्शी कथ्य!

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  25. डर नहीं लगता
    मौत के साये से,
    डर तो यह है
    यह ज़िंदगी
    जियें कैसे.
    सभी क्षणिकाएं एक से बढ़कर एक हैं ...आभार ।

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  26. लाजवाब क्षणिकाएं..बहुत सुन्दर |

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  27. सभी क्षणिकाये एक से बढ़ एक
    बहुत सुन्दर प्रयास !!
    आपको मेरी हार्दिक शुभ कामनाएं!!

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  28. मन के भेद को चुपके से बयाँ करती खूबसूरत क्षनिकाएं |

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  29. मौन पसरा हुआ अँधेरे में
    अश्रु ठहरे हुए हैं पलकों पर,
    कैसे निभाऊँ वादा.bhut achchi pankti.thanks.

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  30. आदरणीय कैलाश जी भाईसाहब
    प्रणाम !

    आप जिस अधिकार से गीत और छंदबद्ध काव्य का सृजन करते हैं , उसी अधिकार से क्षणिकाएं तथा मुक्त छंद की कविताएं भी लिखते हैं

    वास्तव में यहां प्रस्तुत क्षणिकाओं में से किसी एक को चुनना बहुत कठिन है … सभी श्रेष्ठ हैं ।

    पहली क्षणिका के संदर्भ में कहूंगा -
    छुपाए रखिए उनका प्यार सीने में संजीवनी की तरह
    …और बन जाए यही जन्म सौ जन्मों के बराबर !


    जाना कहीं नहीं है … :)

    बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  31. सभी लघु कविताएं गहन भावों को अभिव्यक्त कर रही हैं।
    आपकी रचनाओं में अनुभव के मोती चमकते हैं।

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  32. सभी क्षणिकाएँ एक से बढ़कर एक हैं ! अति सुंदर !

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  33. डर नहीं लगता
    मौत के साये से,
    डर तो यह है
    यह ज़िंदगी
    जियें कैसे.

    सारी क्षणिकाएँ एक से बढ़ कर एक है. बहुत ही गहरी और संवेदनशील. बधाई इस प्रस्तुति के लिये.

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  34. aaj ke jivan ka sach hai ye...

    डर नहीं लगता
    मौत के साये से,
    डर तो यह है
    यह ज़िंदगी
    जियें कैसे.

    sabhi kshanikaayen behtareen, badhai.

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  35. एक अच्छी और गहन रचना. की प्रस्तुति के लिए धन्यवाद । मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  36. bahut acchi kshanikayen ek se badhkar ek..........1,2, 5 bahut hi acchi lagi . badhai ho aapko .

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  37. सभी क्षणिकाएं बहुत बढ़िया लगा ! शानदार प्रस्तुती!

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  38. सभी क्षणिकाएँ हृदयस्पर्शी । आभार ।

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  39. भावमयी क्षणिकाएं,बहुत अच्छे भावों को शब्दबद्ध किया है आपने !

    कृपया पधारें ।

    http://poetry-kavita.blogspot.com/2011/11/blog-post_06.html

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  40. बहुत खूब ... पाँचों जबरदस्त हैं ... और उनकी यादों वाली तो बस कतल है कैलाश जी ...

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  41. बड़े ही रोचक ढंग से अपने मन के भावो को व्यक्त किया है सभी क्षणिकाएं,बहुत सुन्दर है...

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  42. बहुत सुन्दर

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  43. सभी क्षणिकाओं में छिपी दौलत तो हमने देख ली.

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  44. कैलाश जी नमस्कार,क्षणिकायें मन के भावो को सुन्दर अभिव्यक्ति दी है आपने ।

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  45. अहसासों और आरजुओं का अद्भुत चित्रण किया है आपने कैलाश सर.. :)

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  46. sabhi chanikaye bahut hi sundar bhavatmak hai..
    ati uttam

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