Friday, April 19, 2013

श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (४९वीं कड़ी)


                                 मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश: 

       बारहवाँ अध्याय 
(भक्ति-योग-१२.१-११)


अर्जुन :
जो भक्त निरंतर मनोयोग से 
सगुण रूप की पूजा करते.
कुछ अविनाशी निराकार की 
हो एकाग्र उपासना करते.

इन दोनों में कौन हे भगवन!
सबसे श्रेष्ठ योग वेत्ता है?  (१२.१)

श्री भगवान :
मेरे सगुण रूप में हो स्थित 
श्रद्धा सहित उपासना करते.
मेरे मत में ऐसे ही योगी,
श्रेष्ठ सर्व योगियों में रहते.  (१२.२)

अविनाशी अवर्णीय रूप जो 
निराकार और अचिन्त्य है.
करते उपासना सदा सर्वदा
जो अचल व अटल ब्रह्म है.  (१२.३)

समत्व भाव सर्वत्र हैं रखकर,
संयमित सभी इन्द्रियां रखते.
लोककल्याण में सतत रूचि है 
सभी उपासक मुझे ही लभते.  (१२.४)

निराकार ब्रह्म की उपासना 
सगुण भक्ति से दुष्कर है होती.
मनुजों की अव्यक्त ब्रह्म में
गति निश्चय ही कठिन है होती.  (१२.५)

सभी कर्म समर्पित करके
मुझे परायण है जो करता.
अनन्यभाव से योगपूर्वक 
मेरा ध्यान व अर्चन करता.  (१२.६)

अपने मन को जो अर्जुन 
सदा लगाए मुझमें रखता.
मृत्युरूप जगत सागर से 
मैं उसका उद्धार हूँ करता.  (१२.७)

मुझमें मन एकाग्र है करके 
स्थिर बुद्धि करो तुम मुझमें.
इसमें नहीं है संशय अर्जुन 
मृत्यु उपरान्त रहोगे मुझमें.  (१२.८)

अगर नहीं संभव है तुमको,
स्थिर मुझ में स्व मन करना.
अभ्यासयोग के द्वारा अर्जुन,
मुझे प्राप्ति की इच्छा करना.  (१२.९)

यदि असमर्थ अभ्यासयोग में
अर्पित करो स्वकर्म हैं मुझको.
मेरे हेतु कर्म करते भी तुम 
प्राप्त करोगे परम सिद्धि को.  (१२.१०)

यदि अशक्त हो तुम इसमें भी,
कर्म करो मुझको अर्पित कर.
मन, बुद्धि को करो संयमित,
कर्म फलों की चाह त्याग कर.  (१२.११)

               .......क्रमशः

...कैलाश शर्मा 

15 comments:

  1. मनुजों की अव्यक्त ब्रह्म में
    गति निश्चय ही कठिन है होती.......बहुत बढ़िया।

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  2. बहुत सार्थक और सुन्दर प्रस्तुतीकरण | बहुत बहुत बधाई | आभार

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  3. बहुत उम्दा 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)'सुंदर प्रस्तुति,,,

    RECENT POST : प्यार में दर्द है,रामनवमी की शुभकामनायें

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  4. बहुत सुंदर!
    आप कितनी खूबसूरती से गीत में अनुवाद करते हैं....!
    आपकी लेखनी को नमन सर!
    ~सादर!!!

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  5. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (20 -4-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  6. सुन्दर आध्यात्मिक प्रस्तुति . आभार रामनवमी की बहुत बहुत शुभकामनायें औरत की नज़र में हर मर्द है बेकार . .महिला ब्लोगर्स के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MANजाने संविधान में कैसे है संपत्ति का अधिकार-2

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  7. saral sahaj prastuti ........padhkar acchha laga ....

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.

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  9. बढ़िया है आदरणीय-
    शुभकामनायें-

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  10. सार्थक और सुन्दर प्रस्तुती, बधाई

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