Tuesday, April 09, 2013

रोमांच अनिश्चितता का


रमी का खेल
रोके रखते कुछ पत्ते
इंतजार में आने के
बीच या साथी पत्ते के,
नहीं आता वह
और फेंक देते
हाथ के पत्ते को.

लेकिन अगला पत्ता
होता वही
जिसकी थी ज़रुरत
हाथ का पत्ता
फेंकने से पहले.
होता है अफ़सोस
कुछ पल को,
लेकिन आ जाती मुस्कान
कुछ पल बाद
इच्छित पत्ता आने पर.

यह अनिश्चितता ही
बनाये रखती रोमांच
और उत्साह
खेल और जीवन के
हर अगले पल का.

...कैलाश शर्मा

27 comments:

  1. पपलू आने पर तो और मज़ा .... ज़िन्दगी भी यूँ ही कभी इंतज़ार,कभी खुद के हौसले पर चलती है .... हार-जीत हिस्से में होते ही हैं

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  2. कविता खेल खेल में....
    सुन्दर!!!!

    सादर
    अनु

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  3. खेल खेल में बेहतरीन सन्देश,आभार.

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  4. मुझे तो रमी बेहद पसंद है... कोई था जिसके साथ यह खेल बहुत बढ़िया लगता था पर अब सब पहले जैसा नहीं रहा .... खैर आपकी कविता पढ़कर आनंद आया और रमी के वो पुराने दिन भी याद हो आये | सादर

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  5. बहुत ही सुन्दर......हमें तो ताश का कोई भी खेल नहीं आता ।

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  6. बाह सुन्दर ,सरस रचना . बधाई .
    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आने का कष्ट करें .

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  7. यह अनिश्चितता ही बनाये रखती खेल का रोमांच!!!

    RECENT POST: जुल्म

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  8. jindagi bhi ek khel hai sarthak rachna khel khel mai

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  9. khel or jeevan ki anishchintata hi romanch banaye rakhti hai..

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  10. yh romanch hi to mazaa hai khel ka fir chaahe khel rami ka ho ya zindagi ka ...:)

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  11. बहुत सुंदर ! सीक्वेंस या ट्रेल बनाने वाले पत्तों का ही इंतज़ार रहता है रमी में ! और सारा रोमांच हर बंद पत्ते के पीछे छिपा होता है ! जीवन में भी रोमांच और भविष्य के प्रति अनिश्चय की मानसिकता हर नयी सुबह के साथ शुरू हो जाती है और कदाचित यही ड्राइविंग फ़ोर्स बन हमें आगे बढ़ने में भी सहायक सिद्ध होती है ! बहुत सुंदर रचना !

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  12. बहुत ही सुन्दर....

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  13. सच है..... आशा और उत्साह बनाये रखती है ये अनिश्चितता

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  14. बहुत सुन्दर! वास्तव में जीवन ताश के पत्ते के खेल से अधिक या कम कुछ नहीं। प्राप्ति और खोने का सुख दुख पल पल रंग बदल के आते हैं। बधाई आपको इस सुन्दर रचना के लिए!

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  15. वाह खेल खेल में कविता वह भी जीवन से जुडी
    बहुत सुंदर प्रस्तुति

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  16. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार (10-04-2013) के "साहित्य खजाना" (चर्चा मंच-1210) पर भी होगी! आपके अनमोल विचार दीजिये , मंच पर आपकी प्रतीक्षा है .
    सूचनार्थ...सादर!

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  17. हमें तो यह और भी अच्‍छा लगा कि आपकी ताश में इक्‍के के बाद बेगम है। खेल का यही तो मजा है, हर क्षण हार होती है और हर क्षण जीत।

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  18. अनिश्चितता के रोमांच के बारे में पूर्णतः सहमत हूँ. पंक्तियाँ पढ़कर याद आये रमी खेले बरसो बीत गए.

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  19. उत्सुकता का हर पल रोमांचित कर जाता है!

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  20. जीवन भी ऐसे ही खेल खिलाता है...

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  21. सच कहा हा .. जीवन भी तो रमी का खेल है ... आने वाले पल में क्या हो पता नहीं .. बस रोमांच बना रहता है ...

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  22. ऐसी जिंदगी भी होती है .....बहुत बढ़िया जी

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  23. न जाने कितने लोग उसी पत्ते की प्रतीक्षा में हैं।

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  24. क्या खूब मिलाया है रमी और ज़िंदगी को सर!:-)
    बहुत बढ़िया!
    ~सादर!!!

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  25. नवसंवत्सर की शुभकामनायें
    आपको आपके परिवार को हिन्दू नववर्ष
    की मंगल कामनायें

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  26. और ना जाने कितनी बार वो पत्ता पास होते हुये भी पहुँच से दूर ही बना रहता है ।
    बहुत बढ़िया जी.

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