Wednesday, July 24, 2013

आख़िरी सफ़र

कितने भारी लगते             
एक एक पल
मंजिल के निकट आने पर,
थके कदम करते इंकार
आगे बढ़ने को,
टूटे अहसासों का बोझ
चाहता बह जाना
अश्क़ों में.

थके कदमों को
रुकने दें कुछ देर
आख़िरी मंज़िल से पहले,
बहने दें अश्क़ों में
टूटे अहसासों का बोझ,
होने दें शांत कुछ पल
रिश्तों से मिली जलन,
मिलेगा कुछ तो सुकून
और कम होगा कुछ बोझ
शेष यात्रा में.


...कैलाश शर्मा

42 comments:

  1. बहुत मार्मिक अभिव्यक्ति..

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  2. मार्मिक-अभिव्यक्ति-
    आभार आदरणीय-

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  3. वाकई अश्क बह जाने के बाद जब मन हल्का हो जाता है, तो मन को थोड़ा तो सुकून मिल ही जाता है क्यूंकि एक तरह से आँसू मन का ज़हर ही होते है उनका बेह जाना ही अच्छा है। उम्दा भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

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  4. भारी मन से हम क्यों भागें, आने दो जिनको आना है।

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  5. सुन्दर, लेकिन डर लगता है कि

    कहीं ये अश्क, "आसक्ति" की डोर
    को और मजबूत न कर दे .
    मंजिल को गले लगाने से पहले,
    ये अश्क कहीं पैरों की जंजीर न बन जाये।
    सो कुछ ऐसा हो कि,
    बस निर्विकार , निर्लिप्त, शुन्यमय हो जाऊं .

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  6. सत्य को परिभाषित कर दिया।

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  7. मार्मिक के साथ साथ बहुत गहन अभिव्यक्ति.

    रामराम.

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  8. रिश्तों की जलन उम्र भर तकलीफ देगी ... उन्हें भूल जाना ही बेहतर होता है ....

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  9. एक.... मन की गहराइयों को छूती मार्मिक रचना

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  10. sach ko likha hai aapne bahut sundar rachna

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  11. मन को छू लेनेवाली भावपूर्ण रचना..

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  12. बहुत ही सुन्दर मन को छूती हुई रचना

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  13. वाह! बहुत सुंदर.

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  14. रिश्तों की जलन.... कब शांत होती भला... :(

    भावुक करती रचना... सर!

    ~सादर!!!

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  15. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 25/07/2013 को चर्चा मंच पर दिया गया है
    कृपया पधारें
    धन्यवाद

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  16. भीतर तक उतरती संवेदना ..... सच को परिभाषित करते भाव

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  17. आखिरी सफ़र हमेशा बेहद भावुक होता है...और इसके आखिरी होने की कशिश भी कुछ ज्यादा ही सालती है..
    सुंदर रचना।।

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  18. बहुत मार्मिक, सही कहा मंजिल के पास आकर इंतजार नही होता

    बहुत सुंदर लिखा है,शुभकामनाये

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  19. रिश्तों से मिली जलन भला कब खत्म होती है .... बहुत संवेदनशील रचना ।

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  20. मन पर पड़ी अहसासों की छाप हर सफर में साथ होती है सफर चाहे आख़िरी हो या पहला ! काश कोई जादू ऐसा होता कि दिल की पीड़ा बढाने वाली स्मृतियों को वस्त्रों की तरह बदला जा सकता ! मर्मस्पर्शी रचना !

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  21. रिश्ते वही हैं … जो रिसते रहते हैं …. जलन असहनीय होता है … पर यही सच्चाई है … कटु सत्य को उकेरती रचना ….

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  22. गहन संवेदना की मार्मिक अभिव्यक्ति !

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  23. बहुत सटीक विवेचन...मंजिल से पहले रुककर हल्का करना ही होगा..क्योंकि इस मंजिल के आगे एक और सफर है..

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  24. बहुत मार्मिक अभिव्यक्ति..

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  25. मंजिल के निकट आ जाने पर उसे पा लेने की ललक भी बढ़ जाती है इसलिए थकन भी अधिक लगती है ।

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  26. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति

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  27. संवेदनाओं से भरी रचना...

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  28. दुःख हो या सुख..यात्रा यूँ ही निरंतर चलती रहेगी

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  29. रिश्‍तों से मिली जलन को रुक कर शांत होने दें.......बढ़िया, सुन्‍दर। चित्र कविता के गहन भावों के अनुकूल नहीं लग रहा मुझे, खासकर बेतरतीब जींस पहने हुए व्‍यक्ति का। यदि आपको यह सुझाव उचित लगे तो चित्र बदलने का कष्‍ट करें।

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    1. सुझाव के लिए आभार...

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    2. आज ही देखा कि चित्र बदल हुआ है और कविता के भावानुरुप है। धन्‍यवाद श्रीमान।

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  30. lovely but so poignant..
    expressions are so touching..
    piercing right through heart.

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  31. सुंदर रचना.....

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  32. चलते जाना है,ज़िन्दगी का साथ निभाना है,
    कौन सा सफ़र आखिरी है ये किसने जाना है...

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  33. संवेदना से भरी रचना... बहुत सुंदर प्रस्तुति!!

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  34. आखिरी मंजिल पर आकर भी कहाँ मिल पाता है सुकून का एक पल किसी को... भावुक रचना, शुभकामनाएँ!

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