Tuesday, October 22, 2013

करवा चौथ

चाहे हो बेटी, पत्नी या माँ
क्यों आते औरत के ही हिस्से 
सभी व्रत और त्याग 
कभी बेटे और कभी पति के लिए
अहोई अष्टमी या करवा चौथ।
क्यूँ नहीं होता कोई व्रत या त्यौहार 
पुरुषों के लिए भी 
माँ या पत्नी की मंगलकामना को,
मदर्स या वेलंटाइन डे
बन कर रह गये केवल औपचारिकता,
कब तक होता रहेगा शोषण नारी का
त्याग विश्वास और प्रेम के नाम पर,
कब बन पायेगी सच में अर्धांगनी
और देंगे हम उसको
उसका उचित स्थान समाज में।

इंतज़ार है उस दिन का
जब मनायेंगे पुरुष त्यौहार
माँ या पत्नी की मंगलकामना को।

....कैलाश शर्मा

26 comments:

  1. नारी की सहनशक्ति
    कितनी अधिक है पुरुष से
    ये बात बहुत अच्छी तरह
    समझ में आ जाती है
    व्रत रख भी लेगा
    पुरुष उसके लिये
    पर क्या करे
    उसे तो सुबह सुबह ही
    भूख लग जाती है !!!

    :) :) :)

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  2. ऐसे दिन के इंतज़ार के लिए
    मंगलकामनाएं

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  3. नारी नमन
    वह सुबह कभी तो आएगी
    उच्च स्थान की

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (23-10-2013)   "जन्म-ज़िन्दग़ी भर रहे, सबका अटल सुहाग" (चर्चा मंचःअंक-1407)   पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. बहुत सुन्दर ,सटीक प्रश्न कविता के माध्यम से |समाज के रीतिरिवाज के सृजकों के लिए लालकार है |
    नई पोस्ट मैं

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  6. इंतज़ार है उस दिन का
    जब मनायेंगे पुरुष त्यौहार
    माँ या पत्नी की मंगलकामना को-------

    सार्थक संदेश देती सुंदर अनुभूति
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    सादर

    आग्रह है---
    करवा चौथ का चाँद ------

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  7. अच्‍छा कहा है कि जिनके लिए व्रत हो रहे हैं वो भी तो कभी करें उनके लिए।

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  8. क्यूँ नहीं होता कोई व्रत या त्यौहार
    पुरुषों के लिए भी
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

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  9. sundar vichar ... aasha par hi duniya kayam hai :)

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  10. इसके लिए बदलना होगा विधान जो पुरुष तंत्र ने रचा है ... अपने स्वार्थ के लिए ...
    गहरे भाव लिए ...

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  11. mere blog par aap sabhi ka swagat hai
    http://iwillrocknow.blogspot.in/

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  12. बहुत खूब |
    सुंदर प्रश्न उठाया हैं आपने

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  13. मुझे लगता है... भारतीय नारी परोपकार का दूसरा रूप है .. दीपावली की सुभकामनाएँ ..मेरे भी ब्लॉग पर आयें

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  14. सारे प्रेम का प्रवाह एकमार्गी ही क्यों रहे।

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  15. अति सुन्दर भाव ..

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  16. आज कल के कुछ पति भी रखने लगे हैं व्रत .... ये सब व्रत त्योहार मन की आस्था से जुड़ा होना चाहिए न किकिसी दबाव से ।

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  17. जिस दिन हर पुरुष के मन में ऐसी सद्भावना जाग्रत होगी …. सार्थक संदेश...सादर

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  18. सटीक और सार्थक रचना कैलाश जी आभार।

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  19. बहुत ही अच्छे विचार ... जरुरी नहीं की भूखे रहें .....प्यार और ईज्जत दे.....

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