Tuesday, September 02, 2014

निभाया साथ बहुत है ज़िंदगी तूने

दिया है दर्द, अब वही दवा देगा,
मिलेगी मंजिल वही हौसला देगा।

गुनाह गर था जो चाहना उसको,
वही है मुंसिफ़ वही फैसला देगा।

न राह हमने चुनी है, न मंजिल ही,
कहां है जाना वही फैसला लेगा।

गुज़र गया है काफ़िला भी अब आगे,
राह सूनी में चलने का हौसला देगा।

निभाया साथ बहुत है ज़िंदगी तूने,
वक़्त-ए-रुख्सत पे हौसला देगा।
   
   (अगज़ल/अभिव्यक्ति)


...कैलाश शर्मा 


29 comments:

  1. बेहतरीन भावों की लड़ी खुबसूरत

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  2. गुज़र गया है काफ़िला भी अब आगे,
    राह सूनी में चलने का हौसला देगा।

    निभाया साथ बहुत है ज़िंदगी तूने,
    वक़्त-ए-रुख्सत पे हौसला देगा।
    खूबसूरत अलफ़ाज़

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  3. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 04/09/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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  4. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के - चर्चा मंच पर ।।

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ! आस्था और विश्वास का चरम है यह रचना !

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  6. अति सुन्दर भाव

    गुज़र गया है काफ़िला भी अब आगे,
    राह सूनी में चलने का हौसला देगा।

    निभाया साथ बहुत है ज़िंदगी तूने,
    वक़्त-ए-रुख्सत पे हौसला देगा।

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  7. बहुत ही भावपूर्ण और प्रभाव शाली रचना ....

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  8. न राह हमने चुनी है, न मंजिल ही,
    कहां है जाना वही फैसला लेगा।..
    उसी ने बहुत पहले से ही ये तय कर रखा है ... भाव पूर्ण हैं सभी शेर ...

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  9. वाह।।। बहुत बढ़िया

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  10. गुनाह गर था जो चाहना उसको,
    वही है मुंसिफ़ वही फैसला देगा।

    Bahut khoob !

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  11. सब कुछ उसी को सौंप कर आगे बढ़ जाने का नाम ही तो जिन्दगी है...

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  12. बहुत गहरे भावों से सजा गजल गायन। चित्र बहुत मनमोहक है।

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  13. न राह हमने चुनी है, न मंजिल ही,
    कहां है जाना वही फैसला लेगा।
    उम्दा अशआरों के साथ लिखी ग़ज़ल ,सुन्दर

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  14. न राह हमने चुनी है, न मंजिल ही,
    कहां है जाना वही फैसला लेगा।

    गुज़र गया है काफ़िला भी अब आगे,
    राह सूनी में चलने का हौसला देगा।
    ............ शब्‍दश: मन को छूती पंक्तियां

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  15. गुज़र गया है काफ़िला भी अब आगे,
    राह सूनी में चलने का हौसला देगा। bhawuk kar diya aapki abhiwayakti ne kailash jee .......

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  16. न राह हमने चुनी है, न मंजिल ही,
    कहां है जाना वही फैसला लेगा-----

    बहुत सुन्दर और मन को छूती गजल !!वाह !!
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    सादर ---

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  17. निभाया साथ बहुत है ज़िंदगी तूने,
    वक़्त-ए-रुख्सत पे हौसला देगा।
    बहुत सुंदर है दोस्त अर्थ भी भाव भी अशआर की बुनावट भी। बहुत सुंदर है दोस्त अर्थ भी भाव भी अशआर की बुनावट भी।
    अगज़ल का अपना अंदाज़ देखा ,

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  18. बेहतरीन गजल ।
    सुंदर भाव ।
    आभार।

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  19. मन को छूते एहसास... बहुत उम्दा, बधाई.

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  20. जिंदगी स्वयं ही अपना हौसला है !
    प्रेरक रचना !

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  21. दिया है दर्द, अब वही दवा देगा,
    मिलेगी मंजिल वही हौसला देगा।.....बहुत सुंदर.....

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  22. कभी-कभी मन यों ही निर्लिप्त हो जाता है !

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