Tuesday, September 23, 2014

चलो आज बचपन ले आयें

जीवन की आपा धापी में
बचपन जाने कहाँ खो गया,
चलो आज बचपन ले आयें।

कागज़ की कश्ती में जाने
कितने सागर पार किये थे,
कंचे, कौड़ी, छल्लों के बदले
कितने ही व्यापार किये थे।
हीरे, पन्नों की चाहत में 
धन दौलत के पीछे भगते
वह पल जाने कहाँ खो गये,

कुछ पल वे फ़िर से ले आयें,    
चलो आज बचपन ले आयें।

वह मासूम प्रेम के पल थे,
धर्म जाति का भेद नहीं था,
मिलजुल कर के सभी खेलते,
धन दौलत का फ़र्क नहीं था।
सूट, बूट, टाई के अन्दर
वह निर्मलता कहीं दब गयी,
फ़िर से मिलें आज बचपन से
धूल धूसरित तन हो जायें,
चलो आज बचपन ले आयें।

थीं छोटी छोटी बातों में खुशियाँ,
दूर हैं खुशियाँ से, सब पा कर,
कुछ पल की खुशियों की ख़ातिर,
हुए हैं गुम रिश्ते सब पथ पर।    
भूल गये अपना वो बचपन
नाना नानी से सुनीं कहानी,
आज रज़ाई में बच्चों को 
परी लोक की कथा सुनायें,
चलो आज बचपन ले आयें।

बचपन के वे संगी साथी
जाने पथ में कहाँ खो गये,
उन्हें आज़ यदि ढूंढ सकें फ़िर
एक बार बचपन जी जायें,
चलो आज बचपन ले आयें।


...कैलाश शर्मा 

21 comments:

  1. बचपन की यादें ताज़ा करा दीं...बहुत सुन्दर रचना...

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  2. कल 26/सितंबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  3. स्मृतिओं में झांकता बचपन ,बहुत सुन्दर

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  4. यादों का कारवां रुकता कहाँ है जब बचपन की यादें डेरा जमाने लगती हैं ...
    बहुत ही लाजवाब ...

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  5. इक था बचपन.. इक था बचपन..सुंदर भावों से भरी कविता..

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  6. बचपन की बातों को बड़े करीने से स्मृतियों के शो केस में सजाया है ! इन्हीं सारी बातों के लिये आज भी मन तरसता है ! और वो पल चुपचाप सिरहाने आ खड़े होते हैं ! बहुत ही प्यारी रचना !

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  7. बहुत खूब ...बचपन के दिन भी क्या दिन थे......

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  8. इस प्यारे-से बच्चे की हिम्मत की दाद देती हूँ ,खींच लाया आपका बचपन आपके सामने .
    इसके साथ का यही तो सुख है!

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  9. काश वो बचपन फिर लौट आये

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  10. काश वो बचपन फिर लौट आये
    बहुत ही प्यारी रचना !!

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  11. अच्छा लगा बचपन से एकबार फिर मिलकर ! अच्छी रचना !
    नवरात्रि की हार्दीक शुभकामनाएं !
    शुम्भ निशुम्भ बध -भाग ३

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  12. .सुंदर भावों से भरी कविता..

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  13. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से आभार।

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  14. आपने तो हमें बचपन में घुमा दिया. पुरानी यादें ताज़ा करा दीं. भुलाये नहीं भूलते वो दिन...आभार !!

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  15. बहुत खूब !
    कागज़ की कश्ती में जाने
    कितने सागर पार किये थे,
    कंचे, कौड़ी, छल्लों के बदले
    कितने ही व्यापार किये थे।

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  16. Bahut Sundar

    http://swayheart.blogspot.in/2014/09/blog-post.html

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  17. थीं छोटी छोटी बातों में खुशियाँ,
    दूर हैं खुशियाँ से, सब पा कर,
    कुछ पल की खुशियों की ख़ातिर,
    हुए हैं गुम रिश्ते सब पथ पर।
    भूल गये अपना वो बचपन
    नाना नानी से सुनीं कहानी,
    आज रज़ाई में बच्चों को
    परी लोक की कथा सुनायें,
    चलो आज बचपन ले आयें।
    काश ! बचपन वापस ले आये कोई

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