Thursday, February 18, 2016

क्षणिकाएं

हर खिड़की दरवाज़े से
जाते यादों के झोंके
दे जाते कभी
सिहरन ठंडक की
कभी तपन लू की।

बंद कर दीं
सब खिड़कियाँ, दरवाज़े
लेकिन जातीं दरारों से,
बहुत मुश्किल बचना
यादों के झोंकों से।

यादें कब होती मुहताज़
किसी दरवाज़े की।
*****

उधेड़ता रहा रात भर 
ज़िंदगी परत दर परत,
पाया उकेरा हर परत में
केवल तेरा अक्स,
और भी हो गए हरे
दंश तेरी यादों के।

~©कैलाश शर्मा 

31 comments:

  1. यादें कभी फुहार मन के कभी दंश ... पर आ जाती हैं अचानक ...

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  2. यादों का रास्ता कौन रोक सकता है।अति सुन्दर कविता। बहुत खूब।

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  3. यादों का रास्ता कौन रोक सकता है।अति सुन्दर कविता। बहुत खूब।

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  4. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (19.02.2016) को "सफर रुक सकता नहीं " (चर्चा अंक-2257)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  5. बहुत सुन्दर रचना !

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  6. बहुत ही खूबसूरत क्षणिकाएं !

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  7. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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  8. This comment has been removed by the author.

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  9. आदरणीय कैलाश शर्माजी आप की छणिकाएँ सुंदर है जो हमे लिखने को विवश कर रहीं -
    "जल पीना औ पिलाना"
    सिल गये हों होठ तो भी गुनगुनाना चाहिए
    रोना -धोना भूलके वस मुस्कराना चाहिए ।
    विद्रोही की ज्वाला भड़क उट्ठी है क्यों ?
    खुद समझ कर बाद में सबको बताना चाहिए ।
    बस्तियों में फिर चरागों को जलाने वास्ते
    महलों के दीपक कभी भी न बुझाना चाहिए।
    अम्नो -अमन की नदियां अवच्छ हों बहें ,
    और वही जल पीना औ पिलाना चाहिए ।।

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  10. यादों की सुंर क्षणिकाएँ।

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  11. बंद कर दीं
    सब खिड़कियाँ, दरवाज़े
    लेकिन आ जातीं दरारों से,
    बहुत मुश्किल बचना
    यादों के झोंकों से।

    यादें कब होती मुहताज़
    किसी दरवाज़े की।
    यादों को किसी प्रवेश पत्र की जरुरत कहाँ ? सुन्दर शब्द लिखे हैं आदरणीय शर्मा जी आपने !!

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  12. umda kshanikaye adarniy :) shubhsandhya jsk

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  13. उम्दा प्रस्तुति

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  14. सार्थक व प्रशंसनीय रचना...
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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  15. यादों के दंश गहरे होते हैं ।

    मर्म को स्पर्श करती अच्छी कविता ।

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  16. एक से बढ़कर एक क्षणिकाओं की प्रस्तुति। उम्दा प्रस्तुति के लिए आपका आभार।

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  17. बेहतरीन चोटी कवितायें , गागर मे सागर बधाई शर्मा जी

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  18. बहुत उम्दा क्षणिकाएँ

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  19. यादों के भंवर से निकलना आसान तो नहीं..भावपूर्ण रचना..

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  20. In yadon k saye me jindgi saans leti hai......anupam

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  21. बहुत गहरे अभिप्राय ।

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  22. क्या बात है !.....बेहद खूबसूरत रचना....

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  23. उम्दा प्रस्तुति के लिए आपका आभार।
    Mere blog ki new post par aapke vichaar ka swagat hai...

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  24. बेहद बेहेतरीन रचना ।

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