Kashish - My Poetry
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Friday, August 31, 2012
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (३०वीं-कड़ी)
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सातवाँ अध्याय (ज्ञानविज्ञान-योग-७.१३-२३ ) त्रिगुण भाव से मोहित होकर, सारा जगत भ्रमित है रहता. लेकिन मेरे अव्यय स्वरुप से,...
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Tuesday, August 28, 2012
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (२९वीं-कड़ी)
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सातवाँ अध्याय (ज्ञानविज्ञान-योग-७.१-१२ ) श्री भगवान पार्थ लगा मन पूर्ण रूप से यदि तुम योगाभ्यास करोगे. मेरे आश्रय में नि...
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Friday, August 24, 2012
मैंने हार अभी न मानी
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धूल धूसरित चाहे तन हो, रोटी चाहे मिली हो आधी. मैंने हार अभी न मानी, जिजीविषा अब भी है बाकी. सोने को बिस्तर क्या होता, सिर पर कभी न ...
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Monday, August 20, 2012
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (२८वीं-कड़ी)
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छठा अध्याय (ध्यान-योग- ६. ३७-४७) अर्जुन होकर श्रद्धावान भी जो जन, चंचल मन से विचलित होता. तो वह किस गति को पाता है योग सिद्धि ...
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Thursday, August 16, 2012
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (२७वीं-कड़ी)
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छठा अध्याय (ध्यान-योग - ६.२६-३६) चंचल मन हो कर आकर्षित, जब विचलित हो इधर उधर. लौटा कर के उसे वहाँ से, उसे आत्म में ही स्थिर कर. (...
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Monday, August 13, 2012
इंतज़ार धूमिल आँखों का
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जिनके लिए पाले थे स्वप्न अपने स्वप्नों को कुचल कर, उठाये रहे जिनको हमेशा गोदी में, आज ज़िंदगी के आख़िरी पहर में छोड़ गये वृद्ध...
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Friday, August 10, 2012
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (२६वीं-कड़ी)
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**श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें** छठा अध्याय (ध्यान-योग - ६.१६-२५) भोज व उपवास अधिक भी, योग सिद्धि मे...
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