Kashish - My Poetry
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Wednesday, May 29, 2013
तलाश अस्तित्व की
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जो भी मिला जीवन में चढ़ाये था एक मुखौटा अपने चेहरे पर, हो गया मज़बूर मैं भी समय के साथ चलने, चढ़ा लिए मुखौटे अपने चेहरे पर....
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Monday, May 20, 2013
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (५१वीं कड़ी)
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मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश: तेरहवां अध...
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Tuesday, May 14, 2013
किस पिंज़रे में फ़स गया
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(चित्र गूगल से साभार) एक बार तेरे शहर में आकर जो बस गया, ता - उम्र फ...
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Thursday, May 09, 2013
अहसासों का जंगल
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अहसासों के सूने जंगल में ढूंढ रहा वे अहसास जो हो गये गुम जीवन में जाने किस मोड़ पर. हर क़दम पर चुभती हैं किरचें टूटे अहसासो...
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Thursday, May 02, 2013
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (५०वीं कड़ी)
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मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश: बारहवाँ अध्याय...
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Wednesday, April 24, 2013
इंसानियत कराह रही अब मेरे शहर में
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(चित्र गूगल से साभार) दहशतज़दा है हर चेहरा मेरे शहर में, इंसान नज़र आते न अब मेरे शहर में. ...
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Saturday, April 20, 2013
२००वीं पोस्ट - हैवानियत
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(चित्र गूगल से साभार) क्यों पसरती जा रही हैवानियत इंसानों में, क्यों घटता जा रहा अंतर मान...
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