Kashish - My Poetry
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Tuesday, July 30, 2013
हाइकु
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(१) अंतिम यात्रा कितनी आँखें नम है उपलब्धि. (२) धन दौलत क्यों इतना गरूर सब नश्वर. (३) खाली थे हाथ खाली ही ये...
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Wednesday, July 24, 2013
आख़िरी सफ़र
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कितने भारी लगते एक एक पल मंजिल के निकट आने पर , थके कदम करते इंकार आगे बढ़ने को , टूटे अहसासों का बोझ चाहता...
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Saturday, July 20, 2013
‘हिन्दी-हाइगा’ – शब्दों और चित्रों का अद्भुत संगम
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ॠता शेखर ‘मधु’ जी की सद्य प्रकाशित आकर्षक पुस्तिका ‘हिन्दी–हाइगा’ हाथ में आते ही पृष्ठ पलटने का लोभ संवरण नहीं कर पाया और कुछ ही देर में...
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Tuesday, July 16, 2013
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (५४वीं कड़ी)
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मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश: तेरहवां अ...
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Monday, July 08, 2013
अहम् ब्रह्मास्मि
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‘अहम् ब्रह्मास्मि’ नहीं है सन्निहित कोई अहंकार इस सूत्र में, केवल अक्षुण विश्वास अपनी असीमित क्षमता पर. ‘मैं’ ही व्याप्त स...
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Tuesday, July 02, 2013
आज़ ज़ज्बातों को गंगा में बहा आया हूँ
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आज़ ज़ज्बातों को गंगा में बहा आया हूँ, टूटे ख़्वाबों को मैं खुद ही ज़ला आया हूँ. अब न पैरों में चुभेंगी यादों की किरचें, मैं उन्...
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Saturday, June 29, 2013
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (५३वीं कड़ी)
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मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश: तेर...
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