Pages

Saturday, October 01, 2011

बेटी


नहीं सहन होता 
जब कोई कहता है,
तुम्हारी बेटी
बेटों से बढकर है.

एक वाक्य
लगा देता है प्रश्न चिन्ह 
मेरे वज़ूद पर,
और जगा देता है
एक हीन भाव 
बेटे से कमतर होने का.

क्यों मैं अवांछित रहती हूँ 
जन्म लेने से पहले ही ?
क्यों मैं बन कर रह जाती हूँ
केवल सेकंड ऑप्शन
माँ बाप को
सांत्वना का ?

क्यों कर दिया जाता है
परायी जन्म लेते ही 
और दिलाया जाता है 
अहसास
हमेशा पराया होने का ?

देखे हैं किसी ने
मेरे आंसू  
जो बहे हैं चुपचाप
उनसे दूर
उनकी याद में ?

नहीं बनना चाहती
वारिस 
किसी विरासत का.
काश, मिलती पहचान 
मुझे मेरे अपने अस्तित्व से
और न तुलना की जाती
मेरी किसी बेटे से.


44 comments:

  1. नहीं बनना चाहती
    वारिस
    किसी विरासत का.
    काश, मिलती पहचान
    मुझे मेरे अपने अस्तित्व से
    और न तुलना की जाती
    मेरी किसी बेटे से.
    Kaash!

    ReplyDelete
  2. बेटियाँ भी बेटों से अधिक अपना कर्म निभाती हैं।

    ReplyDelete
  3. क्यों मैं अवांछित रहती हूँ
    जन्म लेने से पहले ही ?
    क्यों मैं बन कर रह जाती हूँ
    केवल सेकंड ऑप्शन
    माँ बाप को
    सांत्वना का ?
    bahut sahi kaha

    ReplyDelete
  4. हर बेटी के मन के भावों को उकेर दिया है ..

    ReplyDelete
  5. मन को छूने वाली रचना।

    थैन्क्स गॉड!
    हमारे घर में बेटियां पहले दर्ज़े पर रहीं।

    ReplyDelete
  6. नहीं सहन होता
    जब कोई कहता है,
    तुम्हारी बेटी
    बेटों से बढकर है.
    bhut achi pankti.

    ReplyDelete
  7. मन को छूने वाली रचना। धन्यवाद|

    ReplyDelete
  8. कही अंतर तक झकझोरने वाली रचना. काश इस दर्द से उन्हें बाहर आने का रास्ता मिले और लोग कहे तुम्हारा बेटा तुम्हारी बेटी की तरह ही होनहार है किसी बेटी से कम नहीं.बधाई कैलाश जी

    ReplyDelete
  9. एक बिटिया को यहां देख सकते हैं.

    ReplyDelete
  10. bilkul sahi kaha aapne.... sarthak abhivaykti...

    ReplyDelete
  11. bahut hi badiyaa byang karati hui saarthak rachanaa .badhaai aapko

    meri nai post per aapkaa swagat hai .

    ReplyDelete
  12. इस सम्बन्ध में इतना कहा ,लिखा .पढ़ा गया , लेकिन
    यह बुराई मंच पर दीखती है ,परन्तु ,घरों में श्रधास्थालों ,कुलदेवता -स्थानों में ,पवित्र उचित व सर्व-मान्य है ,तो न्याय कैसे ,कहाँ ...इस कोढ़ का कौन करे इलाज ?.....

    ReplyDelete
  13. महत्वपूर्ण सामाजिक प्रश्न उठाया है। बहुत अच्छी सार्थक अभिव्यक्ति ।

    ReplyDelete
  14. बेटियों को यथोचित स्थान मिले. उनकी अहमियत को समझाने की सुंदर कोशिश कविता के माध्यम से बहुत अच्छी लगी. धन्यबाद.

    ReplyDelete
  15. क्यों कर दिया जाता है
    परायी जन्म लेते ही
    और दिलाया जाता है
    अहसास
    हमेशा पराया होने का

    बेटियों का दर्द इन पंक्तियों में मुखर हो गया है।

    ReplyDelete
  16. यह तुलना वाकई निरर्थक है ,धीरे धीरे जायेगा । अच्छी रचना ।

    ReplyDelete
  17. कई बार बेटा भी जब घर के काम में हाथ बंटाता है तब यही कहा जाता है कि मेरा बेटा तो बेटियों से भी ज्‍यादा काम करता है।

    ReplyDelete
  18. Expressions at its best...
    touch every possible points..
    Lovely touched my heart :)

    ReplyDelete
  19. "काश, मिलती पहचान
    मुझे मेरे अपने अस्तित्व से
    और न तुलना की जाती
    मेरी किसी बेटे से।"
    कडवा सच।

    ReplyDelete
  20. नहीं बनना चाहती
    वारिस
    किसी विरासत का.
    काश, मिलती पहचान
    मुझे मेरे अपने अस्तित्व से
    और न तुलना की जाती
    मेरी किसी बेटे से.


    बहुत सशक्त प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  21. शादी के बाद मारी जाती हैं बहुएं
    और बेटियाँ ...
    जन्म से पहले ही
    घोंट दिया जाता है उनका गला
    ये हिन्दू धर्म में कितना विरोधाभास है की हम नारी जाति की देवी के रूप में पूजा भी करते हैं. काश हमारा कथनी और करनी एक होता ?
    बहुत खूब कहा है कही अंतर तक झकझोरने वाली समझने योग्य है
    बहुत अच्छी सार्थक अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  22. बहुत सार्थक रचना सर,,,
    सादर...

    ReplyDelete
  23. बहुत सुन्दर ....मन को छूने वाली रचना।..

    ReplyDelete
  24. बहुत सार्थक प्रस्तुति!
    --
    राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और यशस्वी प्रधानमंत्री रहे स्व. लालबहादुर शास्त्री के जन्मदिवस पर उन्हें स्मरण करते हुए मेरी भावपूर्ण श्रद्धांजलि!
    इन महामना महापुरुषों के जन्मदिन दो अक्टूबर की आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

    ReplyDelete
  25. बाऊ जी,
    नमस्ते!
    सशक्त अभिव्यक्ति और एक जायज़ ख्वाहिश.
    आशीष
    --
    लाईफ?!?

    ReplyDelete
  26. आपकी पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली (११) के मंच पर प्रस्तुत की गई है /आप आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/आप इसी तरह मेहनत और लगन से हिंदी की सेवा करते रहें यही कामना है /आपका
    ब्लोगर्स मीट वीकली
    के मंच पर स्वागत है /जरुर पधारें /

    ReplyDelete
  27. बेटियों की तुलना किसी भी बेटे से करना गलत बात है | जब तक हम तुलना करते रहेगें, तो वो अपनी अहमियत कैसे समझेंगी |
    *******बहुत ही सुन्दर रचना ******

    ReplyDelete
  28. दिल को झकझोर देने वाली कविता... सचमुच आज भी समाज में लिंग भेद किया जाता है...जो शर्मनाक है.

    ReplyDelete
  29. बहुत ख़ूबसूरत रचना! दिल को छू गई! बेटा और बेटी में आजकल कोई फर्क नहीं है!

    ReplyDelete
  30. नहीं सहन होता
    जब कोई कहता है,
    तुम्हारी बेटी
    बेटों से बढकर है.
    बहुत ही बढि़या ।

    ReplyDelete
  31. हमको अपनी मानसिकता बदलने की ज़रूरत है .......

    ReplyDelete
  32. लाजवाब रचना

    ReplyDelete
  33. बहुत खूबसूरत अहसास समेटे पोस्ट.........लाजवाब |

    ReplyDelete
  34. बे‍टियों के मनोभावों का सुंदर और भावनात्‍मक प्रस्‍तुतिकरण....
    वैसे यह मानव स्‍वभाव है कि वह तुलना करना चाहता है हर किसी का... बेटियां यदि अच्‍छा काम करें मेरी बेटी बेटे से बढकर है... या मेरी बेटी मेरा बेटा है... बेटे यदि घर के कामों में सहयोग करें तो मेरा बेटा बेटी की तरह मदद कर रहा है... आदि आदि....

    ReplyDelete
  35. बे‍टियों के मनोभावों का सुंदर और भावनात्‍मक प्रस्‍तुतिकरण....
    वैसे यह मानव स्‍वभाव है कि वह तुलना करना चाहता है हर किसी का... बेटियां यदि अच्‍छा काम करें मेरी बेटी बेटे से बढकर है... या मेरी बेटी मेरा बेटा है... बेटे यदि घर के कामों में सहयोग करें तो मेरा बेटा बेटी की तरह मदद कर रहा है... आदि आदि....

    ReplyDelete
  36. नहीं बनना चाहती
    वारिस
    किसी विरासत का.
    काश, मिलती पहचान
    मुझे मेरे अपने अस्तित्व से
    और न तुलना की जाती
    मेरी किसी बेटे से.

    Kitni Sunder aur Arthpoorn panktiyan hain...... sach me betiyon ke man ki baat ....

    ReplyDelete
  37. विजया दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं। बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक यह पर्व, सभी के जीवन में संपूर्णता लाये, यही प्रार्थना है परमपिता परमेश्वर से।
    नवीन सी. चतुर्वेदी

    ReplyDelete
  38. आपको विजया दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

    ReplyDelete
  39. आपको एवं आपके परिवार को दशहरे की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  40. कैलाश जी नमस्कार, सुन्दर भाव मन को छू जाने वाली रचना -नही बनना चाह्ती विरासत-----------------

    ReplyDelete
  41. ये हालत तो तब है जब बेटा न तो आजकल "आई एस आई "मार्का होता है न "ब्यूरो ऑफ़ इन्डियन स्टेंडर्ड "सा .मानकीकरण तो तब हो जब भारतीय मर्द अपने दिमाग से सोचता हो -इन्डियन मेल्स आर द्रिविन बाई देयर फीमेल्स .

    ReplyDelete