Kashish - My Poetry
Pages
(Move to ...)
Home
▼
Showing posts with label
अनुत्तरित
.
Show all posts
Showing posts with label
अनुत्तरित
.
Show all posts
Thursday, June 13, 2013
कुछ प्रश्न अनुत्तरित रहने दें
›
सारा जीवन गंवा दिया है प्रश्नों के उत्तर देने में, बैठें भूल सभी बंधन को, कुछ प्रश्न अनुत्तरित रहने दें. सूरज पाने की चाहत में...
32 comments:
›
Home
View web version