Kashish - My Poetry
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Monday, June 11, 2012
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (१४वीं-कड़ी)
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तृतीय अध्याय (कर्म-योग - ३.८-१५) नियत कर्म है उसे करो तुम, कर्म श्रेष्ठ , अकर्म से अर्जुन. बिना कर्म तो नहीं है संभव इस शरीर का ...
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