Kashish - My Poetry
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Saturday, November 28, 2015
क्षणिकाएं
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कुछ दर्द , कुछ अश्क़ , धुआं सुलगते अरमानों का ठंडी निश्वास धधकते अंतस की , तेरे नाम के साथ छत की कड़ियों की अंत हीन गिनती , बन कर र...
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