Kashish - My Poetry
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Saturday, February 14, 2015
प्रेम दिवस
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प्यार नहीं मोहताज़ किसी दिन का यह है एक अनवरत प्रवाह मरुथल हो या गंगा का शीतल जल, रहता है प्रेम अव्यक्त नहीं मांगता कोई प्रत...
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