Kashish - My Poetry
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Tuesday, November 03, 2015
क्षणिकाएं
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उबलते रहे अश्क़ दर्द की कढ़ाई में , सुलगते रहे स्वप्न भीगी लकड़ियों से , धुआं धुआं होती ज़िंदगी तलाश में एक सुबह की छुपाने को अपना अस्...
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Thursday, June 20, 2013
एक प्रश्न
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अंतराल जीवन और मृत्यु का क्यों होता कभी सुख दायक कभी पीड़ा से भरा, क्यों मिलता है कभी दुःख करने पर सत्कर्म भी और जो लीन पा...
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Thursday, June 13, 2013
कुछ प्रश्न अनुत्तरित रहने दें
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सारा जीवन गंवा दिया है प्रश्नों के उत्तर देने में, बैठें भूल सभी बंधन को, कुछ प्रश्न अनुत्तरित रहने दें. सूरज पाने की चाहत में...
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