Kashish - My Poetry
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Wednesday, April 17, 2019
बेटियां
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यादों में जब भी हैं आती बेटियां , आँखों को नम हैं कर जाती बेटियां। आती हैं स्वप्न में बन के ज़िंदगी , दिन होते ही हैं गुम जाती ब...
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Tuesday, March 07, 2017
बेटी
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आँगन है चहचहाता , जब होती बेटियां , गुलशन है महक जाता , जब होती बेटियां। आकर के थके मांदे , घर में क़दम रखते, हो जाती थकन गायब, जब...
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