Kashish - My Poetry
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Wednesday, December 12, 2018
क्षणिकाएं
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जियो हर पल को एक पल की तरह सम्पूर्ण अपने आप में , न जुड़ा है कल से न जुड़ेगा कल से। *** काश होता जीवन कैक्टस पौधे जैसा , अप्र...
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Tuesday, November 03, 2015
क्षणिकाएं
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उबलते रहे अश्क़ दर्द की कढ़ाई में , सुलगते रहे स्वप्न भीगी लकड़ियों से , धुआं धुआं होती ज़िंदगी तलाश में एक सुबह की छुपाने को अपना अस्...
26 comments:
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