Kashish - My Poetry
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शून्य. अँधियारा
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Friday, December 18, 2015
जीवन घट रीत चला
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पल पल कर बीत चला , जीवन घट रीत चला। बचपन था कब आया , जाने कब बीत गया। औरों की चिंता में यौवन रस सूख गया। अब ...
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