Kashish - My Poetry
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Saturday, October 29, 2011
मेरा आईना झूठ बोलता है
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बहुत दिनों बाद देखा कुछ हमउम्र चेहरों को और चौंक गया. वक़्त का तूफ़ान छोड़ गया कितने निशान जो उभर आये चेहरों पर झुर्रियां बन क...
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Monday, October 24, 2011
आओ सब एक दीप जलायें
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प्यार लुटा कर देख लिया अब तक अपनों पर, आओ अब कुछ खुशियाँ बाँटें, बाहर भी जग में. ...
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Thursday, October 20, 2011
वक़्त की लहर
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वक़्त की हर उत्तंग लहर लेकर आती है एक नयी लहर आशा की, लेकिन लौटते हुए बहाकर ले जाती है कुछ और रेत पैरों के नीचे से, और...
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Friday, October 14, 2011
मीरा तो बन सकती हूँ
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अगर नहीं बन पायी राधा, मीरा तो बन सकती हूँ. मुरली बन न अधर छू सकी, मुरली तो सुन सकती हूँ. नहीं ज़रूरी है जीवन ...
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Saturday, October 08, 2011
सूना आकाश
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जून की तपती धूप में गर्मी से बचने की कोशिश में एक कबूतर का जोड़ा बैठा था वरांडे की खिड़की पर. उदास, अकेले नहीं कर रहे थे गुट...
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Saturday, October 01, 2011
बेटी
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नहीं सहन होता जब कोई कहता है, तुम्हारी बेटी बेटों से बढकर है. एक वाक्य लगा देता है प्रश्न चिन्ह मेरे वज़ूद पर, और जगा...
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Saturday, September 24, 2011
चाँद छुप जाओ बादलों में अभी
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चाँद छुप जाओ बादलों में अभी, कहीं ज़माने की तुम्हें नज़र न लगे। प्यार का अर्थ कहाँ समझा है इस दुनियाँ ने, पाक़ दामन...
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