Kashish - My Poetry
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Thursday, November 24, 2016
समस्याएं अनेक, व्यक्ति केवल एक
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समस्याएँ अनेक उनके रूप अनेक लेकिन व्यक्ति केवल एक। नहीं होता स्वतंत्र अस्तित्व किसी समस्या या दुःख का , नहीं होती समस्या कभी सुप्त...
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Friday, October 23, 2015
तलाश शून्य की
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भटकता तलाश में शून्य की घिर जाता और भी अहम् के चक्रव्यूह में , अपनी हर सोच अपनी हर उपलब्धि कर देती जटिल और भी चक्रव्यूह के हर ...
26 comments:
Tuesday, December 17, 2013
‘मैं’ एक समस्यायें अनेक
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समस्यायें अनेक रूप अनेक लेकिन व्यक्ति केवल एक। नहीं होता स्वतंत्र अस्तित्व किसी समस्या या दुःख का , नहीं होती समस्या कभी सुप्ताव...
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