Kashish - My Poetry
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Tuesday, April 18, 2017
क्षणिकाएं
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(1) चहरे पर जीवन के उलझी पगडंडियां उलझा कर रख देतीं जीवन के हर पल को , जीवन की संध्या में झुर्रियों की गहराई में ढूँढता हू...
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Sunday, May 10, 2015
अज़नबी गली
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(मातृ दिवस पर एक पुरानी रचना) हुआ था एक अज़ीब अहसास अज़नबीपन का उस गली में, गुजारे थे जहाँ जीवन के प्रारम्भ के दो दशक. गली...
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