Kashish - My Poetry

Pages

▼
Showing posts with label मोड़. Show all posts
Showing posts with label मोड़. Show all posts
Thursday, May 09, 2013

अहसासों का जंगल

›
अहसासों के सूने जंगल में ढूंढ रहा वे अहसास जो हो गये गुम जीवन में जाने किस मोड़ पर. हर क़दम पर चुभती हैं किरचें टूटे अहसासो...
33 comments:
Monday, July 23, 2012

शब्द क्यों गुम हो गये

›
छा गयी मन में उदासी, भाव क्यों मृत हो गये. लेखनी भी थक गयी है, शब्द क्यों गुम हो गये. अश्क कोरों पर थमे हैं, नयन देते न विदाई. नेह...
46 comments:
›
Home
View web version

About Me

My photo
Kailash Sharma
Delhi, India
View my complete profile
Powered by Blogger.