Kashish - My Poetry
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Thursday, May 09, 2013
अहसासों का जंगल
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अहसासों के सूने जंगल में ढूंढ रहा वे अहसास जो हो गये गुम जीवन में जाने किस मोड़ पर. हर क़दम पर चुभती हैं किरचें टूटे अहसासो...
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Monday, July 23, 2012
शब्द क्यों गुम हो गये
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छा गयी मन में उदासी, भाव क्यों मृत हो गये. लेखनी भी थक गयी है, शब्द क्यों गुम हो गये. अश्क कोरों पर थमे हैं, नयन देते न विदाई. नेह...
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