Kashish - My Poetry
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Monday, June 04, 2012
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (१२वीं-कड़ी)
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द्वितीय अध्याय (सांख्य योग - २.६४-७२) राग द्वेष से जो विमुक्त हो संसारिक विषयों को भोगता. कर लेता वश में जो इन्द्रिय, वह ज्ञानी आ...
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Wednesday, May 30, 2012
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (११वीं-कड़ी)
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द्वितीय अध्याय (सांख्य योग - २.५७-६३) शुभ को पाकर न हर्षित हो, न विषाद अशुभ से होता. है आसक्ति शून्य सर्वत्र, वह ही स्थिर ...
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Monday, May 28, 2012
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (१०वीं-कड़ी)
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द्वितीय अध्याय (सांख्य योग - २.५१-५६) कर्मजनित फल तज कर के जन्म बंधनों से छुट जाते. बुद्धि युक्त साधक आखिर में परम मोक्ष पद...
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Wednesday, May 23, 2012
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (९वीं-कड़ी)
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द्वितीय अध्याय (सांख्य योग - २.४५-५०) त्रिगुण कर्म वेदों में वर्णित, उनसे ऊपर उठो पार्थ तुम. नित्य सत्व में स्थित हो कर, सुख...
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