Kashish - My Poetry
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Friday, October 23, 2015
तलाश शून्य की
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भटकता तलाश में शून्य की घिर जाता और भी अहम् के चक्रव्यूह में , अपनी हर सोच अपनी हर उपलब्धि कर देती जटिल और भी चक्रव्यूह के हर ...
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Sunday, October 11, 2015
कुछ क़दम तो चलें
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एक दिन तो मिलें, कुछ क़दम तो चलें। राह कब एक हैं, मोड़ तक तो चलें। साथ जितना मिले, कुछ न सपने पलें। राह कितनी कठिन, अश्क़ ...
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Thursday, October 01, 2015
उम्र
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उम्र नहीं केवल एक जोड़ हर वर्ष बढ़ते हुए कुछ अंकों का , बढ़ते जाना अंकों का नहीं है अर्थ हो जाना व्यर्थ पिछले अंकों ...
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Saturday, September 26, 2015
प्रकाश स्तम्भ
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प्रकाश स्तम्भ नहीं एक मंज़िल , सिर्फ़ एक संबल दिग्भ्रमित नौका को , दिखाता केवल राह लेना होता निर्णय चलाना होता चप्पू स्वयं अपने ह...
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Sunday, September 13, 2015
इश्क़ को ज़ब से बहाने आ गए
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इश्क़ को ज़ब से बहाने आ गए , दर्द भी अब आज़माने आ गए। दर्द की रफ़्तार कुछ धीमी हुई , और भी गम आज़माने आ गए। ...
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Saturday, September 05, 2015
ऊधो, कहाँ गये मेरे श्याम
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**श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं** ऊधो , कहाँ गये मेरे श्याम। श्याम बिना कैसे मन लागे , अश्रु बहें अविराम। क...
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Thursday, August 27, 2015
शब्दों का मौन
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अंतस का कोलाहल रहा अव्यक्त शब्दों में , कुनमुनाते रहे शब्द उफ़नते रहे भाव उबलता रहा आक्रोश उठाने को ढक्कन शब्दों के मौन का। ब...
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