Kashish - My Poetry
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Wednesday, August 23, 2017
क्षणिकाएं
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व्याकुल हैं भाव उतरने को पन्नों पर , लेकिन सील गये पन्ने रात भर अश्कों से , सियाही लिखे शब्दों की बिखर जाती पन्नों पर और बदरंग हो ...
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Sunday, July 30, 2017
आज दिल ने है कुछ कहा होगा
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आज दिल ने है कुछ कहा होगा , अश्क़ आँखों में थम गया होगा। आज खिड़की नहीं कोई खोली , कोइ आँगन में आ गया होगा। आज सूरज है कुछ इधर...
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Thursday, June 29, 2017
पतझड़
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हरे थे जब पात अपनों का था साथ गूँजते थे स्वर टहनियों पर बने घोंसलों से। रह गया जब ठूंठ अपने गये छूट सपने गये रूठ , कितना ...
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Monday, May 29, 2017
दर्द बिन ज़िंदगी नहीं होती
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दर्द जिसकी दवा नहीं होती , ज़िंदगी फ़िर सजा नहीं होती। चाँद आगोश में छुपा जब हो , नींद भी नींद है नहीं होती। ज़िंदगी साथ में गुज़र...
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Tuesday, April 18, 2017
क्षणिकाएं
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(1) चहरे पर जीवन के उलझी पगडंडियां उलझा कर रख देतीं जीवन के हर पल को , जीवन की संध्या में झुर्रियों की गहराई में ढूँढता हू...
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Sunday, March 12, 2017
दुख दर्द दहन हो होली में
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दुख दर्द दहन हो होली में , हो रंग ख़ुशी के होली में। तन मन आंनदित हो जाये , जब रंग उड़ेंगे होली में। सब भेद भाव मिट जायेंगे , ज...
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Tuesday, March 07, 2017
बेटी
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आँगन है चहचहाता , जब होती बेटियां , गुलशन है महक जाता , जब होती बेटियां। आकर के थके मांदे , घर में क़दम रखते, हो जाती थकन गायब, जब...
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