Kashish - My Poetry
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Saturday, October 04, 2014
अब मैंने जीना सीख लिया
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कर बंद पिटारा सपनों का, बहते अश्क़ों को रोक लिया. अंतस को जितने घाव मिले स्मित से उनको ढांक लिया. विस्मृत कर अब सब रिश्तों को, ...
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Thursday, May 09, 2013
अहसासों का जंगल
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अहसासों के सूने जंगल में ढूंढ रहा वे अहसास जो हो गये गुम जीवन में जाने किस मोड़ पर. हर क़दम पर चुभती हैं किरचें टूटे अहसासो...
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