Kashish - My Poetry
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Thursday, September 14, 2017
दर्द को आशियां मिला
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दर्द को आशियां मिला , मिरे घर का निशां मिला. तू न मेरा नसीब था , दर्द का साथ तो मिला. रात भर जागते रहे , सुबह खाली मकां मि...
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Tuesday, June 04, 2013
सुबह ढूंढेंगे फ़िर सपने, अभी तो शाम ढलती है
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इन हथेली की लकीरों से, कहाँ तक़दीर बनती है, मुसाफ़िर ही सदा चलते, कभी मंज़िल न चलती है. चलो अब घर चलें, सुनसान कोने राह तकते हैं,...
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Tuesday, February 26, 2013
ठहरा हुआ वक़्त
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मिल जाता चंद लम्हों का अहसास तुम्हारे साथ होने का, गुनगुनाता तुम्हारे गीत मेरा आशियाँ आज भी. ****** ख्वाबों का आशियाँ ...
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