Kashish - My Poetry

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Thursday, January 17, 2019

क्षणिकाएं

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मत बांटो ज़िंदगी दिन , महीनों व सालों में , पास है केवल यह पल जियो यह लम्हा एक उम्र की तरह। **** रिस गयी अश्क़ों में रिश्तों की...
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Thursday, October 01, 2015

उम्र

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उम्र नहीं केवल एक जोड़ हर वर्ष बढ़ते हुए कुछ अंकों का , बढ़ते जाना अंकों का नहीं है अर्थ हो जाना व्यर्थ पिछले अंकों ...
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Saturday, April 20, 2013

२००वीं पोस्ट - हैवानियत

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                                      (चित्र गूगल से साभार) क्यों पसरती जा रही हैवानियत इंसानों में, क्यों घटता जा रहा अंतर मान...
29 comments:
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Kailash Sharma
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