Kashish - My Poetry
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Thursday, August 27, 2015
शब्दों का मौन
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अंतस का कोलाहल रहा अव्यक्त शब्दों में , कुनमुनाते रहे शब्द उफ़नते रहे भाव उबलता रहा आक्रोश उठाने को ढक्कन शब्दों के मौन का। ब...
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Tuesday, May 14, 2013
किस पिंज़रे में फ़स गया
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(चित्र गूगल से साभार) एक बार तेरे शहर में आकर जो बस गया, ता - उम्र फ...
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