Kashish - My Poetry
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Friday, March 07, 2014
अनुत्तरित प्रश्न
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मुझसे उत्तर मत मांगो बेटी, यह प्रश्न अनुत्तरित रहने दो. आकर सपने में तुम बेटी, एक प्रश्न रोज़ करती माँ से. क्यो...
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Friday, March 08, 2013
हाइकु (अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर)
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(१) स्त्री का सम्मान पुरुषत्व की शान कब जानोगे? (२) नारी दिवस तब बने सार्थक रोज़ दो मान. (३) न होत...
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Tuesday, January 29, 2013
मत बांधो मुझको परिभाषा के बंधन में
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मत बांधो मुझको परिभाषा के बंधन में, मुझको तो बस नारी बन कर जीने दो. बचपन कब बीता तितली सा, हर कदम कदम पर पहरा था. प्रतिपल...
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