Kashish - My Poetry
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Thursday, November 27, 2014
यादें
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कल खरोंची उँगलियों से दीवारों पर जमी यादों की परतें , हो गयीं घायल उंगलियाँ रिसने लगा खून डूब गयीं यादें कुछ पल को उँगलियों के दर्द...
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Thursday, November 13, 2014
शब्द
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तैर रहे थे शब्द हवाओं में प्रतीक्षा में संवरने को पंक्ति में, भरा था लबालब अंतस भावों से पाने को एक अभिव्यक्ति शब्दों में, टिकी हुईं थी ...
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Tuesday, November 04, 2014
सूनापन
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सूना सूना मन लगता है, कहीं न अपनापन लगता है। घर के जिस कोने में झाँकूं, वहां अज़ानापन लगता है। क्यूँ खुशियों के चहरे पर भी अनजान...
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Monday, October 27, 2014
चौराहा
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चौराहे पर खड़ा हूँ कब से, भ्रमित चुनूँ मैं राह कौन सी। कौन राह मंज़िल को जाए, अंध गली ले जाय कौन सी। जितने पार किये चौराहे , नया...
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Saturday, October 04, 2014
अब मैंने जीना सीख लिया
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कर बंद पिटारा सपनों का, बहते अश्क़ों को रोक लिया. अंतस को जितने घाव मिले स्मित से उनको ढांक लिया. विस्मृत कर अब सब रिश्तों को, ...
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Tuesday, September 23, 2014
चलो आज बचपन ले आयें
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जीवन की आपा धापी में बचपन जाने कहाँ खो गया , चलो आज बचपन ले आयें। कागज़ की कश्ती में जाने कितने सागर पार किये थे , कंचे , कौड़ी , ...
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Thursday, September 11, 2014
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (१८वां अध्याय)
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मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश: अठ...
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