Kashish - My Poetry
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Sunday, July 30, 2017
आज दिल ने है कुछ कहा होगा
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आज दिल ने है कुछ कहा होगा , अश्क़ आँखों में थम गया होगा। आज खिड़की नहीं कोई खोली , कोइ आँगन में आ गया होगा। आज सूरज है कुछ इधर...
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Tuesday, April 18, 2017
क्षणिकाएं
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(1) चहरे पर जीवन के उलझी पगडंडियां उलझा कर रख देतीं जीवन के हर पल को , जीवन की संध्या में झुर्रियों की गहराई में ढूँढता हू...
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Saturday, May 16, 2015
साथ आंसुओं का
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हर वक़्त है तुम्हारा , बहने लगते अनवरत निभाते हैं साथ दुखों के पल में , नहीं जाते दूर छलक जाते हैं खुशियों के ...
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