Kashish - My Poetry

Pages

▼
Showing posts with label वक़्त. Show all posts
Showing posts with label वक़्त. Show all posts
Sunday, July 30, 2017

आज दिल ने है कुछ कहा होगा

›
आज दिल ने है कुछ कहा होगा , अश्क़ आँखों में थम गया होगा। आज खिड़की नहीं कोई खोली , कोइ आँगन में आ गया होगा। आज सूरज है कुछ इधर...
22 comments:
Tuesday, April 18, 2017

क्षणिकाएं

›
      (1) चहरे पर जीवन के उलझी पगडंडियां उलझा कर रख देतीं जीवन के हर पल को , जीवन की संध्या में झुर्रियों की गहराई में ढूँढता हू...
25 comments:
Saturday, May 16, 2015

साथ आंसुओं का

›
हर वक़्त है तुम्हारा , बहने लगते अनवरत निभाते   हैं   साथ दुखों के पल में , नहीं जाते   दूर छलक जाते   हैं खुशियों के ...
25 comments:
›
Home
View web version

About Me

My photo
Kailash Sharma
Delhi, India
View my complete profile
Powered by Blogger.