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Sunday, July 30, 2017
Tuesday, April 18, 2017
क्षणिकाएं
(1)
चहरे पर
जीवन के
उलझी पगडंडियां
उलझा कर रख देतीं
जीवन के हर पल को,
जीवन की संध्या में
झुर्रियों की गहराई में
ढूँढता हूँ वह पल
जो छोड़ गये निशानी
बन कर पगडंडी चहरे पर।
उलझी पगडंडियां
उलझा कर रख देतीं
जीवन के हर पल को,
जीवन की संध्या में
झुर्रियों की गहराई में
ढूँढता हूँ वह पल
जो छोड़ गये निशानी
बन कर पगडंडी चहरे पर।
(2)
होता
नहीं विस्मृत
छोड़ा था हाथ
ज़िंदगी के
जिस मोड़ पर।
छोड़ा था हाथ
ज़िंदगी के
जिस मोड़ पर।
ठहरा है
यादों का कारवां
आज भी उसी मोड़ पर,
शायद देने को साथ
मेरे प्रायश्चित में
थम गया है वक़्त भी
उसी मोड़ पर।
आज भी उसी मोड़ पर,
शायद देने को साथ
मेरे प्रायश्चित में
थम गया है वक़्त भी
उसी मोड़ पर।
(3)
आसान कहाँ हटा
देना
तस्वीर दीवार से
पुराने कैलेंडर की तरह,
टांग देते नयी तस्वीर
पुरानी ज़गह पर,
लेकिन रह जाती
खाली जगह तस्वीर के पीछे
दिलाने याद उम्र भर।
तस्वीर दीवार से
पुराने कैलेंडर की तरह,
टांग देते नयी तस्वीर
पुरानी ज़गह पर,
लेकिन रह जाती
खाली जगह तस्वीर के पीछे
दिलाने याद उम्र भर।
...©कैलाश शर्मा
लेबल:
Kashish-My Poetry,
कैलाश शर्मा,
चहरा,
जीवन,
झुर्रियां,
तस्वीर,
दीवार,
पगडंडियां,
मोड़,
वक़्त
Saturday, May 16, 2015
साथ आंसुओं का
हर वक़्त है तुम्हारा,
बहने लगते अनवरत
निभाते हैं साथ
दुखों के पल में,
नहीं जाते दूर
छलक जाते हैं
खुशियों के पल में।
छलके थे आँखों से
देखा ज़ब अचानक
देहरी पर तुमको
और छुप गए
तुम्हारी बाहों में,
बरसे हैं फ़िर से ये
सावन के बादल से
देख तुम्हें जाते
आज उसी देहरी से।
बहने लगते अनवरत
निभाते हैं साथ
दुखों के पल में,
नहीं जाते दूर
छलक जाते हैं
खुशियों के पल में।
छलके थे आँखों से
देखा ज़ब अचानक
देहरी पर तुमको
और छुप गए
तुम्हारी बाहों में,
बरसे हैं फ़िर से ये
सावन के बादल से
देख तुम्हें जाते
आज उसी देहरी से।
जन्म से मृत्यु तक
निरंतर साथ अश्रु का,
आ जाते खुशियों के साथ
निरंतर साथ अश्रु का,
आ जाते खुशियों के साथ
माँ की आँखों में
देख मासूम सूरत
देख मासूम सूरत
पहली बार गोद में
अपने बच्चे की,
बरसे थे आँखों से
छोड़ गया था जब वह
वृद्धाश्रम दरवाज़े पर,
बरसे थे आँखों से
छोड़ गया था जब वह
वृद्धाश्रम दरवाज़े पर,
और शायद लगें बहने
किसी के इंतज़ार में
अंतिम यात्रा के प्रयाण में।
किसी के इंतज़ार में
अंतिम यात्रा के प्रयाण में।
...© कैलाश
शर्मा
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