Tuesday, October 29, 2013

क्षणिकायें

सिरहाने खड़े ख्वाब         
करते रहे इंतज़ार
आँखों में नींद का,
पर न विस्मृत हुईं यादें
और न थमे आंसू,
इंतज़ार में थके ख़्वाब
बह गये अश्क़ों के साथ 
छोड़ नयन तन्हा.

*****

सूखने लगीं पंखुडियां     
बिखरने लगे अहसास
थक गए पाँव,
तरसती है हथेली
पाने को एक छुवन
तुम्हारे हाथों की,
चुभने लगा है गुलाब
हथेली में काँटों की तरह 
एक तेरे इंतजार में.

*****

बहुत कोशिश की अंतस ने      
ढूँढने को सुकून
अपने अन्दर हर कोने में,
पर पसरा पाया
एक गहन सूनापन
अंधी गली की तरह.

जब न हो कोई चाह
या मंज़िल का उत्साह,
एक एक क़दम लगता भारी,
कितना कठिन होता
चलना सुनसान राहों पर
अनजान मंजिल की ओर.  


.....कैलाश शर्मा 

38 comments:

  1. सच है की किसी न किसी चाहत का बना रहना जरूरी होता है ... वर्ना सुनसान राहें जीना मुश्किल कर देती हैं ...

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  2. बढ़िया क्षणिकाएं-
    आभार आदरणीय-

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  3. वाह सभी बहुत ही सुन्दर |

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  4. बेहतरीन क्षणिकाएं......

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  5. सुन्दर क्षणिकाएं सभी की सभी (नई पोस्ट अश्रु मेरे दृग तेरे ..."

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  6. बढ़िया क्षणिकाए,आभार ,

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  7. गहन एहसास पिरोती सुंदर क्षणिकाएं......

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  8. इंतज़ार में थके ख़्वाब
    बह गये अश्क़ों के साथ
    छोड़ नयन तन्हा..... सुन्दर ... अति सुन्दर !
    चुभने लगा है गुलाब
    हथेली में काँटों की तरह
    एक तेरे इंतजार में..... वियोग की पीड़ा
    सभी क्षणिकाएं बेहद प्रभावी!

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  9. बेहतरीन क्षणिकाएं..

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  10. बहुत ही बढ़िया सर!


    सादर

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  11. behad prabhavi kshanikaye ..abhar

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  12. गहन अहसासों की बहुत ही भावपूर्ण अभिव्यक्ति ! सभी क्षणिकाएं अत्यंत कोमल एवँ मर्मस्पर्शी !

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  13. बेहतरीन क्षणिकाएँ....

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  14. भावुक हृदय से निकली बेहतरीन क्षणिकाएं

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  15. इंतज़ार में थके ख़्वाब

    बह गये अश्क़ों के साथ

    छोड़ नयन तन्हा

    बहुत सुंदर कविता।

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  16. सुन्दर क्षणिकाएं.

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  17. इस पोस्ट की चर्चा, बृहस्पतिवार, दिनांक :-31/10/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक -37 पर.
    आप भी पधारें, सादर ....

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  18. एक बार पुन: आप अहसास की गहरी तहों को छूकर आए हैं। लेकिन इस सूनेपन में प्रेम में अडिग होने का अपना अनुभव एक अजीब आनन्‍द भी तो प्रदान करता है.....। (की और) के स्‍थान पर (की ओर) कर लें।

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    1. टाइपिंग की त्रुटि की ओर इंगित करने के लिए आभार...

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  19. लगा रहे मन कहीं क्षितिज में,
    धरती नभ दोनों सध जायें।

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  20. गहन अहसासों के आधार लिखी गयी सुन्दर क्षणिकाएं !
    नई पोस्ट हम-तुम अकेले

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  21. सुंदर! बेहतरीन !!

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  22. दीप पर्व आपको सपरिवार शुभ हो!
    कल 02/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  23. बेहतरीन क्षणिकाएँ... कैलाश जी आपकी हर विधा लाजवाब है यू ही लिखते रहे ॥दीपावली की शुभ कामनाएँ

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  24. वाह...उत्तम लेखन ...दीपावली की शुभकामनाएं.....

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  25. वाह!!! बहुत सुंदर !!!!!
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई--

    उजाले पर्व की उजली शुभकामनाएं-----
    आंगन में सुखों के अनन्त दीपक जगमगाते रहें------

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  26. आपकी अभिव्यक्ति में / अनुभव बोलते हैं !
    आपको link दे रही hu सर -------- आपकी टिप्पणी / मेरे लिए अमोल है :)
    चाँद

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