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Sunday, June 16, 2013

पितृ दिवस

छोटी छोटी उंगलियों से 
पकड़ कर हाथ 
चलना सीखा पिता के साथ,
नहीं दे पाते थे छोटे छोटे पैर
पिता के क़दमों का साथ,
कर लेते अपने क़दम धीमे
देने बेटे के कदमों का साथ, 
थक जाने पर उठा लेते गोदी में
नहीं महसूस हुआ कभी बेटे का भार.

आज पिता के पैर
हो गए अशक्त
नहीं दे पाते साथ
बेटे के तेज़ क़दमों का,
बढ़ गया बेटा आगे
छोड़ कर अशक्त हाथ
जो बढे उसकी ओर
सहारे को.

नहीं देखा मुड़ कर
पीछे रह गये पिता को,
नहीं की कम गति
अपने क़दमों की,
कमज़ोर क़दमों का साथ देने.

शायद महसूस हो
उन्हें भी पिता का प्यार
जब हाथों को पकडे
छोटी उंगलियाँ
और साथ चलते छोटे क़दम,
बढ़ जायें आगे
अशक्त क़दमों को
पीछे छोड़ कर.

....कैलाश शर्मा