Wednesday, October 23, 2019

जीवन यात्रा


कितनी दूर चला आया हूँ,
कितनी दूर अभी है जाना।
राह है लंबी या ये जीवन,
नहीं अभी तक मैंने जाना।

नहीं किसी ने राह सुझाई,
भ्रमित किया अपने लोगों ने।
अपनी राह न मैं चुन पाया,
बहुत दूर जाने पर जाना।

बढ़े हाथ उनको ठुकराया,
अपनों की खुशियों की खातिर।
लेकिन आज सोचता हूँ मैं,
अपने दिल की क्यूँ न माना।

माना समय नहीं अब बाकी,
जो भी बचा उसे अपनाया।
जो भी रेत बचा मुट्ठी में,
उसको ही उपलब्धि माना।

...©कैलाश शर्मा

12 comments:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में गुरुवार 24 अक्टूबर 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. नहीं किसी ने राह सुझाई,
    भ्रमित किया अपने लोगों ने।
    अपनी राह न मैं चुन पाया,
    बहुत दूर जाने पर जाना।
    जीवन का यही सच है मुट्ठी भर रेत को उपलब्धि समझ हम इतराते रहते हैं आखिर पता चलता है जीवन भर दौडऩे के बाद भी ठिकाने तक ही न पहुंच पाये...
    बहुत ही लाजवाब सृजन
    वाह!!!

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  3. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज गुरुवार 24 अक्टूबर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (25-10-2019) को  "धनतेरस का उपहार"     (चर्चा अंक- 3499)     पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।  
    --
    दीपावली से जुड़े पंच पर्वों की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ 
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. नी दूर अभी है जाना।
    राह है लंबी या ये जीवन,
    नहीं अभी तक मैंने जाना।

    hmm..har man k bhaaw hain ye

    bahut sarltaa se sateek baat keh di aapne

    achhe lekhan ke liye bdhaayi aur hum sab ke sath use share krne ke liye aabhar

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  6. बहुत अच्छा लेख है Movie4me you share a useful information.

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  7. very useful information.movie4me very very nice article

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