समर्पित किया तुम्हें
जीवन का एक एक पल,
तुम्हारी खुशियों के लिए
भुला दिए अपने सपने,
केवल देकर के एक दिन
चाहते चुकाना अपना ऋण?
यह एक दिन भी मेरा कहाँ?
इस दिन का फैसला तुम्हारा,
कहाँ जी पाते यह दिन भी
स्व-इच्छानुसार.
रहने दो अपना यह अहसान,
अगर दे सको तो देना
प्रेम, सम्मान, सुरक्षा
जो है मेरा अधिकार.
इतनी भी नहीं कमज़ोर
जो मांगूं भीख अधिकार की,
अब नहीं चाहती बनना
केवल अनुगामिनी,
जिस दिन बन पाऊँगी सहगामिनी
जीवन के हर क्षेत्र में
नहीं होगा केवल एक दिन मेरे लिए.
....कैलाश शर्मा
जीवन का एक एक पल,
तुम्हारी खुशियों के लिए
भुला दिए अपने सपने,
केवल देकर के एक दिन
चाहते चुकाना अपना ऋण?
यह एक दिन भी मेरा कहाँ?
इस दिन का फैसला तुम्हारा,
कहाँ जी पाते यह दिन भी
स्व-इच्छानुसार.
रहने दो अपना यह अहसान,
अगर दे सको तो देना
प्रेम, सम्मान, सुरक्षा
जो है मेरा अधिकार.
इतनी भी नहीं कमज़ोर
जो मांगूं भीख अधिकार की,
अब नहीं चाहती बनना
केवल अनुगामिनी,
जिस दिन बन पाऊँगी सहगामिनी
जीवन के हर क्षेत्र में
नहीं होगा केवल एक दिन मेरे लिए.
....कैलाश शर्मा