Tuesday, March 20, 2012

अकेलापन

      (१)
अंधियारे का मौन
नयनों का सूनापन
अश्कों की अतृप्त प्यास
रिश्तों की झूठी आस
धड़कते दिल की गूँजती आवाज़ 
रहते हैं हर समय साथ
इस कमरे में 
और नहीं महसूस होने देते
दर्द अकेलेपन का.

      (२)
आती नहीं कोई आहट
दरवाज़े पर, 
मौन हैं गलियों में
कदमों के स्वर,
तोड़ने को मौन 
अकेलेपन की घुटन का
पूछते हैं एक दूसरे से
क्या तुमने कुछ कहा.

     (३)
चले थे अकेले
जुड़ते रहे लोग
कारवां चलता रहा.
आये कुछ मोड़
छूट गए रिश्ते,
और आज इस मोड़ पर
खड़ा अकेला
ढूँढ़ रहा हूँ 
उस कारवां के 
कदमों के निशां.

कैलाश शर्मा 

62 comments:

  1. सुन्दर भाव कणिकाए .

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  2. सुन्दर भाव कणिकाए .

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  3. तोड़ने को मौन
    अकेलेपन की घुटन का
    पूछते हैं एक दूसरे से
    क्या तुमने कुछ कहा.

    कितना शोर मचाता है ये मौन अकेलेपन में .... नि:sहब्द करती क्षणिकएं

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  4. अकेलेपन की घुटन....और मौन का सूनापन....
    बहुत गहन रचना...

    सादर.

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  5. अकेलेपन की आवाज़ बनी सुन्दर क्षणिकाएं!

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  6. bahut hi sundar.....pahla wala sabse accha laga.

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  7. अकेलेपन की त्रासदी का खूब चित्रण किया है।

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  8. Silence is is very disturbing... especially in advance age..

    Silence
    have riches of
    vocabulary
    and variety of shades.
    Its existence
    gives cuts
    sharper than blades...

    Awesome expressions
    the pain and agony was well reflected !!

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  9. लाजवाब क्षणिकाएं... पहली क्षणिका भाव विभोर कर गई... अकेलापन भी बहुत कुछ कह जाता है और नहीं रहने देता अकेले... गहन भाव... आभार

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  10. कितनी दिलकश क्षणिकाएं हैं सर.... वाह!
    सादर बधाई...

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  11. रची उत्कृष्ट |

    चर्चा मंच की दृष्ट --

    पलटो पृष्ट ||


    बुधवारीय चर्चामंच

    charchamanch.blogspot.com

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  12. अनुपम भाव संयोजन लिए उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति ।

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  13. बहुत मार्मिक भाव लिए सुन्दर क्षणिकाएं...

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  14. कभी-कभी तो अकेलापन भी बहुत भाता है,
    आदमी इस बहाने अपने से मिल पता है !

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  15. बहुत भावपूर्ण लगी आपकी ये क्षणिकाएं...बधाई

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  16. आपके इस पोस्ट की चर्चा यहाँ पर है..!

    http://tetalaa.nukkadh.com/2012/03/blog-post_20.html

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  17. सब आहटों के इंतज़ार में हैं, फिर भी आहट नहीं
    उम्मीदों की पहल हो तो कोई बात बने ...

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  18. sach akela aakar sabse judkar bhi ek din akele chala jaata hai insaan..
    akelepan ko mukhar karti sarthak rachna..

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  19. phir koi aayegaa,judegaa aapse
    ek se do honge ,do se chaar
    kaarvaan phir banegaa .....
    achhee rachnaa

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  20. बहुत मार्मिक भाव लिए सुन्दर उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति

    my resent post

    काव्यान्जलि ...: अभिनन्दन पत्र............ ५० वीं पोस्ट.

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  21. सोचने को मजबूर करती क्षणिकाएं ... आभार.

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  22. prabhavit karti hui.....bahut achchi lagi.

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  23. बहुत ही मार्मिक भाव संयोजन के साथ सार्थक एवं प्रभावशाली रचना....

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  24. gahri anubhuti .....gajab ki rachana ...badhai sweekaren.

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  25. waah kailash jee dil ko choo gai aaki ye abhiwaykti.

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  26. gahan bhavon ki abhivyakti .NAVSAMVATSAR KI HARDIK SHUBHKAMNAYEN !shradhey maa !

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  27. bahut khub. sahi kaha aapne. akelapan bahut shor karta hai.

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  28. बहुत बढिया!!अकेलेपन का बहुत सुन्दर चित्रण किया है!

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  29. अकेलापन इन सबसे कितना भरा भरा लगता है।

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  30. कलात्मक रचना प्रभावशाली है बधाईयाँ जी /

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  31. बहुत बढिया।

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  32. बहुत सुन्दर , पहला और तीसरा छंद तो लाजबाब है !

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  33. क़दमों की चाप तो सीने पर हुआ करती है जो दर्द ही देती है . अति सुन्दर सृजन..

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  34. कल 22/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल (संगीता स्वरूप जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  35. जिंदगी के सूनेपन को बखूबी लिख डाला हैं आपने ...

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  36. सूनापन सूना नहीं...शब्दों के माध्यम से मुखर हो उठा|

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  37. संवेदना के भाव लिए पंक्तियाँ ....बहुत सुंदर

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  38. ...और नहीं महसूस होने देते
    दर्द अकेलेपन का.

    दर्द ही दवा बन जाता है कभी कभी

    तीनों ही रचनाएँ अच्छी लगीं

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  39. अकेलेपन में अक्सर इंसान खुद से ही बात करता है ...
    तीनों बहुत गहरी ... भाव प्रधान ...

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  40. अंधियारे का मौन
    नयनों का सूनापन
    अश्कों की अतृप्त प्यास
    रिश्तों की झूठी आस
    धड़कते दिल की गूँजती आवाज़
    रहते हैं हर समय साथ
    इस कमरे में
    और नहीं महसूस होने देते
    दर्द अकेलेपन का.
    why should i say thank you for these beautiful lines
    no .never . i am jealous of you. pranam swikaren.

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  41. खड़ा अकेला
    ढूँढ़ रहा हूँ
    उस कारवां के
    कदमों के निशां.
    जिंदगी का सत्य यही है

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  42. मौन के क्रंदन को परिभाषित करती रचनायें ...बहुत सुन्दर

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  43. दर्द ले कर चलती हुवी तीनों रचनाएं ..लाजवाब

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  44. तीनों ही रचनायें लाजवाब हैं ....

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  45. बहुत खूब....
    बहुत ही बढ़िया रचना है....

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  46. akelepan ko abhivyakt karti khoobsurat kanikayen...

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  47. आती नहीं कोई आहट
    दरवाजे पर,
    मौन हैं गलियों में
    कदमों के स्वर,
    तोड़ने को मौन
    अकेलेपन की घुटन का
    पूछते हैं एक दूसरे से
    क्या तुमने कुछ कहा.

    इस कविता का कथ्य सहज संप्रेषित है और और शिल्प नितांत मौलिक।

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  48. उम्र के इस दौर में
    यह अकेलापन
    बहुत ही काटता है.
    सुनहले दिन, रिश्ते-नाते,मित्र
    और बाँकापन-
    बहुत ही काटता है.

    यथार्थ के धरातल पर चित्र उकेरे आपने........मार्मिक...........

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  49. अनुभूति का चित्रांकन कड़ी कुशलता से किया है !

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  50. maun khali sannata dil ki garaiyon se nikalte shabd aur chal deta hai abhivyakti ka karvaan...atisundar rachna.bahut pasand aai.

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  51. अंधियारे का मौन
    नयनों का सूनापन
    अश्कों की अतृप्त प्यास
    रिश्तों की झूठी आस
    धड़कते दिल की गूँजती आवाज़
    रहते हैं हर समय साथ
    इस कमरे में
    और नहीं महसूस होने देते
    दर्द अकेलेपन का.

    दर्द का प्रहार बहुत तीव्र है. बहुत सुंदर कवितायेँ.

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  52. और आज इस मोड़ पर
    खड़ा अकेला
    ढूँढ़ रहा हूँ

    कष्ट दायक ...
    जीवन की हकीकतें विश्वास लायक नहीं लगतीं कई बार....
    आभार भाई जी !

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  53. वो निशां भी मिलेंगे ओर कारवाँ भी ..............

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