Friday, February 07, 2014

सूनापन

गुम हो गये हैं शब्द
जीवन के कोलाहल में,
बैठे हैं मौन
तकते एक दूजे को,
कहने को बहुत कुछ
एक दूसरे की नज़रों में
पर नहीं चाहते तोड़ना
मौन अहसासों का,
छुपाते एक दूसरे से 
दर्द अंतस का,
अश्क़ आँखों के,
भय अकेलेपन के भविष्य का।

अहसास होने या न होने का
हो जाता और भी गहन
एक दूजे के मन में
जीवन के सूनेपन में।

....कैलाश शर्मा 

34 comments:

  1. ये स्थिति सर्वव्‍यापी हो गई है। आपने इस स्थिति को शब्‍द देकर इस पर सोचने-विचारने का अवसर प्रदान किया है। गहन अनुभूति है जीवन की दुखदायी मीमांसा का इस सूनेपन में।

    ReplyDelete
  2. एकान्त का पीड़ासित शब्दचित्र।

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (08-02-2014) को "विध्वंसों के बाद नया निर्माण सामने आता" (चर्चा मंच-1517) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
    Replies
    1. गुम हो गये हैं शब्द
      जीवन के कोलाहल में,
      बैठे हैं मौन... ek duje ko nhi bs akele ka sunapn jhelte.....
      bahut khub kailash....

      Delete
  4. सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई आपको

    ReplyDelete
  5. bahut sundar rachna hardik badhai

    ReplyDelete
  6. bahut sundar rachna hardik badhai aapko kailash ji

    ReplyDelete
  7. शिथिल मन नीरवता नहीं तोड़ पता ....उदासी घेर लेती है तब ...!!
    सुंदर रचना ...!!

    ReplyDelete
  8. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन 7 फरवरी वर्षगांठ और वैवाहिक वर्षगांठ सब एक साथ मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete
  9. मन का जुड़ाव किसी के न होने के अहसास को बहुत गहरा बना देता है ....सच है

    ReplyDelete
  10. इस दौड़ भाग ज़माने में अपनी जिंदगी कहीं खो सी गयी है .....बोलना बहुतकुछ चाह कर भी बोल नहीं पाते.... सही शब्दों के साथ सूनापन चित्रित ..... बहुत सुंदर ....!!

    ReplyDelete
  11. एक ऐसी स्थिति जिससे शायद सबको गुजरना होता है . आपने इसे एक प्रवाह में बाँध कर सुन्दर रचना रूप दे दिया है.

    ReplyDelete
  12. सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  13. बेहतरीन अभिवयक्ति.....

    ReplyDelete
  14. दर्द अंतस का भय भविष्य के अकेलेपन का।।।।।.......
    मार्मिक।

    ReplyDelete
  15. बहुत ही सुन्दर अभिवयक्ति..

    ReplyDelete
  16. क्या बात है...

    ReplyDelete
  17. अहसास होने या न होने का
    हो जाता और भी गहन
    एक दूजे के मन में
    जीवन के सूनेपन में....behatareen par man thoda udaas ho gaya

    ReplyDelete
  18. आप तथा सभी मित्रों को वसंत-मॉस की हृदयात मधुर वधाइयां ! सब को चहेतों से मीठा मीठा प्यार मिओलता रहे !
    अच्छे भावात्मक प्रस्तुतीकरण हेतु वधाई !

    ReplyDelete
  19. बहुत सुंदर भावनाएं और शब्द भी.

    ReplyDelete
  20. भय अकेलेपन के भविष्य का उन्हें आज भी मौन किये है … गहन भाव

    ReplyDelete
  21. मौन अहसास बहुत कुछ कहते हैं ! शुभकामनायें

    ReplyDelete
  22. अहसास होने या न होने का
    हो जाता और भी गहन
    एक दूजे के मन में
    जीवन के सूनेपन में।

    बहुत ही सुंदर प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है।

    ReplyDelete
  23. बहुत सुन्दर ....

    ReplyDelete
  24. मौन ....यादों का सफ़र ..
    शुभकामनायें!

    ReplyDelete
  25. अहसास होने या न होने का
    हो जाता और भी गहन
    एक दूजे के मन में
    जीवन के सूनेपन में।

    ..............बहुत ही सुंदर प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  26. मौन को मुखरित करती सुन्दर रचना |

    ReplyDelete
  27. उदासी को बड़ी शिद्दत के साथ परिभाषित किया है रचना में ! बहुत ही गहन एवँ प्रभावशाली प्रस्तुति !

    ReplyDelete