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Friday, February 07, 2014

सूनापन

गुम हो गये हैं शब्द
जीवन के कोलाहल में,
बैठे हैं मौन
तकते एक दूजे को,
कहने को बहुत कुछ
एक दूसरे की नज़रों में
पर नहीं चाहते तोड़ना
मौन अहसासों का,
छुपाते एक दूसरे से 
दर्द अंतस का,
अश्क़ आँखों के,
भय अकेलेपन के भविष्य का।

अहसास होने या न होने का
हो जाता और भी गहन
एक दूजे के मन में
जीवन के सूनेपन में।

....कैलाश शर्मा 

Wednesday, July 24, 2013

आख़िरी सफ़र

कितने भारी लगते             
एक एक पल
मंजिल के निकट आने पर,
थके कदम करते इंकार
आगे बढ़ने को,
टूटे अहसासों का बोझ
चाहता बह जाना
अश्क़ों में.

थके कदमों को
रुकने दें कुछ देर
आख़िरी मंज़िल से पहले,
बहने दें अश्क़ों में
टूटे अहसासों का बोझ,
होने दें शांत कुछ पल
रिश्तों से मिली जलन,
मिलेगा कुछ तो सुकून
और कम होगा कुछ बोझ
शेष यात्रा में.


...कैलाश शर्मा

Tuesday, February 26, 2013

ठहरा हुआ वक़्त


मिल जाता
चंद लम्हों का अहसास
तुम्हारे साथ होने का,
गुनगुनाता तुम्हारे गीत
मेरा आशियाँ आज भी.
******


ख्वाबों का आशियाँ
अब भी है बेताब
रात की तन्हाई में
सुनने को एक आहट
तुम्हारे कदमों की.
******

अश्क़ भी हैं भूल गए
नयनों से गिरना,
रह गयीं सूखी लक़ीरें
तप्त कपोलों पर
तुम्हारे इंतज़ार में.
******


क्यूँ दिखाए सपने
खुली आँखों से
ग़र तोड़ना ही था,
मेरी वफ़ा का बाँध
बहने भी नहीं देता
इन्हें अश्क़ों के साथ.
****** 


मिल जाते पंख 
भरने लगता उड़ान 
ठहरा हुआ वक़्त,
पाकर तुम्हारा साथ
कुछ पल को.


कैलाश शर्मा