Friday, March 07, 2014

अनुत्तरित प्रश्न

मुझसे उत्तर मत मांगो बेटी,
यह प्रश्न अनुत्तरित रहने दो.

आकर सपने में तुम बेटी,               
एक प्रश्न रोज़ करती माँ से.
क्यों मौन रहीं तुम माँ होकर,
जब रोका जग में आने से?

मैं कैसे तुमको समझाऊँ बेटी,
उस पल थी क्यों मौन रही?
रोम रोम तड़पा था तब मेरा,
जब तुझको आने दिया नहीं.

मैं नहीं चाहती थी मेरी बेटी
आफ़रीन बन दुनिया में आये.
परिवार की बेटे की चाहत में,
तुझको न कहीं दुत्कारा जाये.

कैसे तुम को बतलाऊँ मैं बेटी?
न समझोगी दर्द विवशता का.
कितने स्वप्न बुने मेरे मन ने
हर ताना बुनते तेरे स्वेटर का.

पर अब न ऐसा फिर होने दूंगी,
मेरी गोदी में तुझको आना होगा.
चाहे दुनिया हो जाये एक तरफ़,
तुझको फ़िर घर में लाना होगा.

अब मुझको न समझो अशक्त,
सह लिया दर्द अबला बन कर.
अब कमज़ोर न होंगे हाथ मेरे,
कर सकती रक्षा दुर्गा बन कर.

तुम्हें सिखाऊँगी जग से लड़ना,
तुमको अशक्त न मैं बनने दूँगी.
जाग गयी मेरे अन्दर की नारी,
जन्म पूर्व तुझको न मरने दूँगी.


...कैलाश शर्मा 

36 comments:

  1. तुम्हें सिखाऊँगी जग से लड़ना,
    तुमको अशक्त न मैं बनने दूँगी.
    जाग गयी मेरे अन्दर की नारी,
    जन्म पूर्व तुझको न मरने दूँगी....aaj kal aisa ho bhi raha hai ...sundar aur satrhk rachna

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  2. तुम्हें सिखाऊँगी जग से लड़ना,
    तुमको अशक्त न मैं बनने दूँगी.
    जाग गयी मेरे अन्दर की नारी,
    जन्म पूर्व तुझको न मरने दूँगी..

    बहुत ही सुंदर सृजन...! बधाई कैलास जी....

    RECENT POST - पुरानी होली.

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  3. तुम्हें सिखाऊँगी जग से लड़ना,
    तुमको अशक्त न मैं बनने दूँगी.
    जाग गयी मेरे अन्दर की नारी,
    जन्म पूर्व तुझको न मरने दूँगी

    बहुत जरूरी वादा जो हर माँ को निभाना है

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  4. बेहद मार्मिकता से परिपूर्ण अभिव्यक्ति।
    बहुत लाज़वाब आदरणीय आपकी रचना।
    हार्दिक बधाई

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  5. उमड़ी नारी, नारी के लिए अच्‍छी बात है

    सुबह हो गई बीती घुप काली रात है

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  6. Bahut hi bhawuk aur mrmsparshi rachna..! Sunder khayaal aur ehsaas!

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  7. सुन्दर सार्थक भाव, सबकी आवश्यकता है इस जगत को।

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  8. सार्थकता और सन्देश का भाव देती अभिव्यक्ति

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  9. बहुत ही मर्मस्पर्शी, भावपूर्ण कविता … प्रभावशाली विचार ...

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  10. बहुत सुंदर एवं मर्मस्पर्शी.
    नई पोस्ट : पंचतंत्र बनाम ईसप की कथाएँ

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  11. सार्थक सन्देश देती रचना

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  12. बहुत सुन्दर

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  13. मर्मस्पर्शी रचना...

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  14. धन पराया हूँ फिर भी मैं ही तो वल्लरी वंश की बढाती हूँ ।
    जन्म लेने दो मुझको मत मारो कल के वैभव की नई थाती हूँ॥

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  15. बहुत ही सशक्त और सार्थक रचना.

    रामराम.

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  16. महिला दिवस पर प्रेरक पंक्तियाँ...

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  17. बहुत ही ससक्त और विचारणीय रचना ..... बहुत सुंदर ...

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  18. कल 09/03/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  19. बेहद मार्मिकता से परिपूर्ण अभिव्यक्ति।

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  20. बहुत ही सार्थक भावपूर्ण मार्मिक रचना, आभार आपका।

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  21. सार्थक भाव लिए मन को छू लेनेवाली रचना...

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  22. नारी व्यथा को परिभाषित करने में सफल रचना ।

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  23. मार्मिक ... मजबूरी और साहस जो केवल माँ ही दे सकती है ... जब वो मजबूरी से पार पा लेगी तभी आशा जगेगी ...

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  24. bahut sundar rachna ............satik aur sarthak bhav.......

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  25. यदि माँ यह संकल्प ले ले तो उत्तर अवश्य मिलेगा.. अति सुन्दर रचना के लिए बधाई..

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  26. मंगलकामनाएं माँ को !!

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  27. सर मुझे आपका ब्लॉग ही आज मिला हैं पर अब लगता हैं सारी पोस्ट्स पढनी पड़ेगी क्यूंकि मुझे लगता हैं कि आप भी मेरी तरह बहुत ज्यादा ही आध्यात्मिक पृवत्ति के हो !!!!!!!!
    nice पोस्ट :-)

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  28. बहुत गहन और सुन्दर पोस्ट

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  29. वाह...प्रभावी रचना.....बहुत बहुत बधाई...

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  30. बहुत खूब आदरणीय!..................................

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  31. अपने वक्त से संवाद करती बेहद सशक्त रचना।

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  32. माँ की प्रेरणा पा कर बेटी दुनिया से जूझ लेगी .

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  33. holi ki hardik शुभकामनाएं |

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