(१)
कौन है जिंदा
शहर कब्रस्तान
दफ़न ख़्वाब.
ख्वाबों की
लाश
कन्धों पर ढो रहा
जिंदा है कैसे?
(३)
मन का पंछी
बेचैन उड़ने को
घायल पंख.
(४)
मन का पंछी
बंधा रिश्ते डोर में
तोड़ न पाए.
(५)
आत्मा है पंछी
कब है बाँध पाया
शरीर इसे.
(६)
क्या है
तुम्हारा
किस पर गुमान
छोड़ जाना है.
(७)
बांटते जाना
अंतर्मन से प्यार
असली खुशी.
(८)
जीना ज़िंदगी
टुकड़ों
टुकड़ों में
मुश्किल
होता.
(९)
सुनेगा कौन
अहसास दिल के
मुर्दों के बीच
इंसान नहीं जिंदा
हैवानों का है राज.
(१०)
राह के कांटे
चुनते चलो तुम
होगा आसान
पीछे आने वालों को
राहों पर चलना.
.....कैलाश शर्मा