Thursday, June 04, 2015

भटकते शब्द

मन से मन का संवाद
कुंवारी साँसों का स्पंदन,
विस्तार स्वप्नों का
आँखों से आँखों तक,
अनछुए स्पर्श की
सनसनाहट रग रग में,
अंतस के अहसासों की
एक चमक नज़रों में,
हो गए सब बेमानी
न व्यक्त होने से केवल शब्दों में।

देखता है खड़ा दूर से
बना अनजान हालात से
चहुँ ओर घूमते शब्दों को
नहीं आ पाए जो कभी हाथ में
और आज खो दिया अर्थ
होने या न होने का

....© कैलाश शर्मा 

30 comments:

  1. देखता है खड़ा दूर से
    बना अनजान हालात से
    चहुँ ओर घूमते शब्दों को
    नहीं आ पाए जो कभी हाथ में
    और आज खो दिया अर्थ
    होने या न होने का।
    शानदार और प्रभावी शब्द आदरणीय श्री कैलाश शर्मा जी !

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  2. सच है बिलकुल ... उचित शब्द और उनकी उचित अभिव्यक्ति शब्दों के व्यक्त होने में ही है ...
    अगर नहीं तो अपना महत्त्व खो देते हैं ...

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  3. मन से मन का संवाद
    कुंवारी साँसो का स्पंदन
    विस्तार स्वप्नों का
    आँखों से आँखों तक,
    गहरे अहसासों से भरी कविता।अति सुन्दर शर्मा जी।

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  4. मन से मन का संवाद
    कुंवारी साँसो का स्पंदन
    विस्तार स्वप्नों का
    आँखों से आँखों तक,
    गहरे अहसासों से भरी कविता।अति सुन्दर शर्मा जी।

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  5. उचित शब्द तलासने ही होंगे अभव्यक्ति के लिए

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  6. शब्द के बिना अभिव्यक्ति कैसी.

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  7. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (05-06-2015) को "भटकते शब्द-ख्वाहिश अपने दिल की" (चर्चा अंक-1997) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  8. शब्‍द ही एक के अनुभव को दूसरे के सम्‍म्‍ाुख प्रकट करते हैं.............गहन भावनाओं से युक्‍त कविता।

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  9. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

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  10. अभिव्यक्ति की गूढ़ता समाहित किये शब्द।

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  11. वियोगी होगा पहला - कवि आह से उपजा होगा - गान ।
    उमड कर ऑखों से चुपचाप बही होगी सरिता अनजान ॥

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  12. हर एहसास को शब्द की अभिव्यक्ति चाहिए अन्यथा अहसास का होना न होना बराबर है --सुन्दर अभियक्ति
    अनुभूति : अपूर्ण मकसद !:
    मेरे विचार मेरी अनुभूति: चक्रव्यूह

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  13. हो गए सब बेमानी
    न व्यक्त होने से केवल शब्दों में
    वाह जनाब वाह ..बहुत गहरे भाव ...सादर

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  14. सुंदर भावाभिव्यक्ति...भावनाओं और विचारों की प्रभावी अभिव्यक्ति के लिए सही शब्द का होना आवश्यक है...

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  15. सर आपकी अभिव्यक्ति ने
    मुझे भी कुछ अभिव्यकत करने को प्रेरित किया।
    सो कर रहा हूँ :-
    मौन संवाद भी हुई,
    तो अर्थ तलाश ही लेगी ।
    उस कोने में न सही,
    तो इस कोने में ही ,
    अस्तित्व सहेज ही लेगी ।
    हाँ शब्द होते ,
    तो दुनियांवी मेले लगते ।
    कुछ अपने होते ,
    तो कुछ पराये होते ।

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    1. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण...

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  16. सुन्दर भावाभिव्यक्ति

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  17. सुन्दर भावाभिव्यक्ति

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  18. बहुत सुन्दर

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  19. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार...

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  20. सुन्दर कविता

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  21. शब्दों की भी अपनी सीमा है, शब्द कुछ दूर तक ही साथ चलते हैं..मौन अनंत है

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  22. बहुत बहुत खूबसूरत सार्थक रचना आदरणीय।
    बिलकुल सही
    उचित शब्द न मिले तो मन की मन में ही रह जाती है
    अभिव्यक्त न हो सके उन शब्दों की कसक फिर दिल में कभी उठ ही आती है

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  23. सच है जो शब्दों में व्यक्त हो जाये दिखाई देता है सुनाई देता है पढ़ा जा सकता है भावनाएँ मन ऑंखें कुछ ही लोग पढ़ पाते है
    सार्थक अभिव्यक्ति

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  24. सच है जो शब्दों में व्यक्त हो जाये दिखाई देता है सुनाई देता है पढ़ा जा सकता है भावनाएँ मन ऑंखें कुछ ही लोग पढ़ पाते है
    सार्थक अभिव्यक्ति

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  25. बहुत ही उम्‍दा रचना।

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