Sunday, September 13, 2015

इश्क़ को ज़ब से बहाने आ गए

इश्क़ को ज़ब से बहाने गए,
दर्द भी अब आज़माने गए।

दर्द की रफ़्तार कुछ धीमी हुई,
और भी गम आज़माने गए।

कौन कहता है अकेला हूँ यहाँ,
याद भी हैं साथ देने गए।

रात भर थे साथ में आंसू मिरे,
सामने तेरे छुपाने गए।

हाथ में जब हाथ था आने लगा,
बीच में फिर से ज़माने गए

            (अगज़ल/अभिव्यक्ति)


....©कैलाश शर्मा
 

27 comments:

  1. वाह ... बहुत ही लाजवाब कमाल के शेरों से सजी गज़ल ...

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  2. ज़माने का काम ही है बीच में आ जाना अच्छे शेरो से सजी गज़ल

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  3. खूबसूरत ग़ज़ल।

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  4. खूबसूरत ग़ज़ल।

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  5. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (14-09-2015) को "हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक-2098) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. वाह ! हर शेर लाजवाब ! बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल !

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  7. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, खुशहाल वैवाहिक जीवन का रहस्य - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  8. अच्छी गजल कही शर्मा जी बधाई

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  9. अच्छी गजल ........ शर्मा जी

    राज चौहान
    आपका मेरे ब्लॉग पर इंतजार है.
    अज्ञेय जी की रचना... मैं सन्नाटा बुनता हूँ :)
    http://rajkumarchuhan.blogspot.in

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  10. सुन्दर शब्द रचना
    http://savanxxx.blogspot.in

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  12. कौन कहता है अकेला हूँ यहाँ,
    याद भी हैं साथ देने आ गए।

    रात भर थे साथ में आंसू मिरे,
    सामने तेरे छुपाने आ गए
    पहली बार शायद आपकी गजल पढ़ रहा हूँ और यकीन मानिए अच्छी बन पड़ी है आदरणीय शर्मा जी !!

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  13. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार....

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  14. कौन कहता है अकेला हूँ यहाँ,
    याद भी हैं साथ देने आ गए।

    Bahut Umda

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  15. उत्कृष्ट प्रस्तुति

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  16. बस यही कहूंगा......वाह...वाह...वाह.....बहुत बहुत बधाई......

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  17. ''इश्क को जब बहाने आ गए.., दर्द को वह अजमाने आ गए'' बेहद उम्दा रचना की प्रस्तुति।

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