अब न
खेलूंगी श्याम संग होरी.
बहुत
सतावे है वह मोको, बहुत करे बरजोरी.
चुनरी भीग
गयी है मोरी, भीग गयी है चोरी.
कैसे जाऊं
मैं अब घर पे, देख रहीं सब छोरी.
कान्हा
शरम न आवै तुमको, हरदम सूझे होरी.
आओगे जब
बरसाने, समझोगे तब तुम होरी.
प्रेम रंग
बरसे है ब्रज में, कैसे रहती कोरी.
भीग रंग
में तेरे कान्हा, बनी सदा को तोरी.
होली की हार्दिक शुभकामनायें
....कैलाश शर्मा

