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Saturday, March 15, 2014

अब न खेलूंगी श्याम संग होरी

अब न खेलूंगी श्याम संग होरी.
बहुत सतावे है वह मोको, बहुत करे बरजोरी.  
चुनरी भीग गयी है मोरी, भीग गयी है चोरी.   
कैसे जाऊं मैं अब घर पे, देख रहीं सब छोरी.   
कान्हा शरम न आवै तुमको, हरदम सूझे होरी.  
आओगे जब बरसाने, समझोगे तब तुम होरी.    
प्रेम रंग बरसे है ब्रज में, कैसे रहती कोरी.
भीग रंग में तेरे कान्हा, बनी सदा को तोरी.    

होली की
हार्दिक शुभकामनायें 

....कैलाश शर्मा 

Wednesday, August 28, 2013

आओ अब समय नहीं बाकी

चहुँ ओर गहन अँधियारा है,  
विश्वास सुबह का पर बाकी.
हो रहा अधर्म है आच्छादित,  
है स्थापन धर्म वचन बाकी.  

अब नहीं धर्म का राज्य यहाँ,
अपने स्वारथ में सभी व्यस्त.
दुर्योधन जाग उठा फ़िर से,
बेबस द्रोपदी फिर आज त्रस्त.

द्वापर में आये तुम कान्हा,
कलियुग में आना अब बाकी.

ब्रज में अब सूनापन पसरा,
गोपियाँ सुरक्षित नहीं कहीं.
हर जगह दु:शासन घूम रहे,
पर चीर बढ़ाने कृष्ण नहीं.

विश्वास न टूटे इनका गिरधर,
अब विश्वास दिलाना है बाकी.

अब भक्ति तेरी व्यवसाय हुई,
निष्काम कर्म को भूल गए.
प्रवचन करते हैं जो गीता पर,
वह घृणित कर्म में लिप्त हुए.

भर गया पाप का घड़ा बहुत,    
आओ अब समय नहीं बाकी.

**श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें**


.....कैलाश शर्मा