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Saturday, September 05, 2015

ऊधो, कहाँ गये मेरे श्याम

**श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं**   

ऊधो, कहाँ गये मेरे श्याम।
श्याम बिना कैसे मन लागे, अश्रु बहें अविराम।     
कछू न भावत है जग माहीं, बिन सूरत अभिराम।      
ज्ञान लगे नीरस इस मन को, ढूंढ रहा मन श्याम।       
अब तो आन मिलो हे कान्हा, सूना है बृज धाम।            
निकस न पायें प्राण हमारे, बिना दरस के श्याम।          
हुआ कठोर तुम्हारा मन क्यों, ऐसे कब थे श्याम।

...©कैलाश शर्मा

Wednesday, August 28, 2013

आओ अब समय नहीं बाकी

चहुँ ओर गहन अँधियारा है,  
विश्वास सुबह का पर बाकी.
हो रहा अधर्म है आच्छादित,  
है स्थापन धर्म वचन बाकी.  

अब नहीं धर्म का राज्य यहाँ,
अपने स्वारथ में सभी व्यस्त.
दुर्योधन जाग उठा फ़िर से,
बेबस द्रोपदी फिर आज त्रस्त.

द्वापर में आये तुम कान्हा,
कलियुग में आना अब बाकी.

ब्रज में अब सूनापन पसरा,
गोपियाँ सुरक्षित नहीं कहीं.
हर जगह दु:शासन घूम रहे,
पर चीर बढ़ाने कृष्ण नहीं.

विश्वास न टूटे इनका गिरधर,
अब विश्वास दिलाना है बाकी.

अब भक्ति तेरी व्यवसाय हुई,
निष्काम कर्म को भूल गए.
प्रवचन करते हैं जो गीता पर,
वह घृणित कर्म में लिप्त हुए.

भर गया पाप का घड़ा बहुत,    
आओ अब समय नहीं बाकी.

**श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें**


.....कैलाश शर्मा